जिंदगी के रंग – 96

पलट कर अंजुमन-ए- ज़िंदगी को देखा

याद आये इस महफिल के

कई पल… कई रंग….. !

सीखे नियमों का अंधा अनुकरण,

अपनी सोंच कम .

लोग क्या कहेंगे …..

औरों को ख़ुश रखने की कोशिश ….

सब बेकार हो गया .

बेज़ार ज़िंदगी ने हीं सिखाया सबक़ .

किसी का दिल दुखाए बिना ,

अपने नियम बनाओ !

अपने लिए खड़े होना सीखो ,

अपने आप को प्यार करो

और ख़ुश रखो !!!!

एक राह

एक राह दिख गया गुलाबों की पंखुड़ियों भरा !!

चल दिए उसपर ,

भूल कर कि गुलाबों में काटें भी होते हैं……..

काटों की कसक आज भी है.

ख़त

पता बदल चुका है,

पर दिल है कि

मानता नहीं.

वही लवों पर छलकती

ख़तों की भाषा

पुरानी यादों की ख़ुशबू,

उसी पते पर आतीं और

द्वार खटखटातीं है.

शिद्दत

ज़रूर दिल बादलों का भी किसी ने दुखाया होगा,

वर्ना इतनी शिद्दत से बरसता कौन है?

Unknown

ज़िंदगी के रंग -95

सोंच- संभाल कर

बोली के जादू को काम में लाओ .

बातों के रंग

निराले होते हैं.

ना जाने कब , कैसे

किसी की बातें

दिल में उतर कर मन मोह लेतीं हैं.

किसी की , तीर बन दिल को चीर जातीं हैं,

नश्तर बन मन को छलनी कर देतीं हैं.

पहेली

आँसू और मुस्कान की पहेली पुरानी है.

ख़ुशी हो या ग़म

आँखे छलक हीं जातीं हैं.

ये मुस्कान भी फ़रेब है या सच

पहेली बन हीं जाती है .

उदास मुस्कान

उदास मुस्कान ,

एक नयन में आँसू

दूसरे में खिलती हँसी.

कौन सच , कौन मिथ्या ?

उदासी या हँसी ?

आँसुओं को आँखों हीं आँखों में पीती

आँखों की करुणा

या लबों की मुस्कान ?

जिंदगी के रंग -67

Topic by-

#IndiSpire240

What is inspiration? How different is it from hard-work, focus, involved approach, practice, and research? #Inspiration

Rekha Sahay's avatarThe REKHA SAHAY Corner!

साँसे चले …समय गुजरता रहे बस …..

क्या यही है ज़िंदगी?

ना मक़सद …. ना ख़्वाब ……

हसीन तोहफ़ा है यह ज़िंदगी.

थोड़ी तमन्ना, अभिलाषा, लालसा

 लक्ष्य…. मकसद मिला कर 

गुनगुनाइये…..

राहें खुलती जायेंगीं।

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ज़िंदगी के रंग -95

कटे का दर्द तो ठीक हो जाता है ,

पर रह जाते है निशान याद दिलाने के लिए .

ज़िंदगी के रंग -137

लहरें टूट कर बिखरने पर दुगने जोश के साथ आतीं हैं………

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हौसला और मुस्कान के साथ

गिरना और गिर कर उठना

कितनों को आता है ?

लहरों को देखो ,

हर बार गिर कर ,

टूट कर बिखरने पर भी

दुगने जोश के साथ आतीं हैं.

बिना गिरे हीं हम

चलना सीख नहीं सकते .

जीवन में लगी हर ठोकर ,

हर चोट कुछ ना कुछ

सीख दे कर जाती है .

चलना सीखा जातीं हैं.