पलट कर अंजुमन-ए- ज़िंदगी को देखा
याद आये इस महफिल के
कई पल… कई रंग….. !
सीखे नियमों का अंधा अनुकरण,
अपनी सोंच कम .
लोग क्या कहेंगे …..
औरों को ख़ुश रखने की कोशिश ….
सब बेकार हो गया .
बेज़ार ज़िंदगी ने हीं सिखाया सबक़ .
किसी का दिल दुखाए बिना ,
अपने नियम बनाओ !
अपने लिए खड़े होना सीखो ,
अपने आप को प्यार करो
और ख़ुश रखो !!!!










You must be logged in to post a comment.