Author: Rekha Sahay
आदत
इक अजीब सी आदत जाती नहीं.
जब भी परेशां होतें हैं-
तुमसे बातें करने की हसरत जागती हैं।
पर मिलोगे कहाँ?
रास्ता और पता मालूम नहीं.
ज़िंदगी के रंग – 195
सुनना ना पड़े शिकवे हवाओं को इसलिये,
क़ैद कर दिया चराग-ए-लौ को काँच के ताबूत…
…..कांच की चिमनी में.
जैसे रुह जिस्म के क़फ़स… पिंजरे में बंदी है,
दुनिया के बंदिशों में।

अर्थ- क़फ़स= पिंजरा, शरीर,जाली
Happy New Year 2020!!
On the last day of year, Just want to say thanks to all the beautiful people. You made me smile . Wish you happy and Fabulously prosperous New Year!

सतह का तनाव
पानी के क़तरे में चींटी को देखा क़ैद,
सतह तनाव को ना तोड़ पाने से,
एक बड़ी सी जल बूँद के अंदर.
ऐसे हीं क़ैद हो जातें है,
हम भी यादों के क़ैद में.
लगता है, दुनिया में हो कर भी नहीं हैं
और कभी नहीं तोड़ पाएँगे
इस कमज़ोर पारदर्शी बुलबुले के क़ैद को….

सतह तनाव- surface tension
ज़िंदगी के रंग – 194
ज़िंदगी कट गई भागते दौड़ते.
थोड़ा रुककर कर,
ठहर कर देखा – चहचहातीं चिड़ियों को,
ठंड में रिमझिम बरसती बूँदे,
हवा में घुली गुलाबी ठण्ड……
खुशियाँ तो अपने आस-पास हीं बिखरीं हैं,
नज़रिया और महसूस करने के लिए फ़ुर्सत….
वक़्त चाहिए.

ज़िंदगी के रंग – 197
यह जीवन एक यात्रा है, निरंतर बहते जल प्रवाह सा. हर किसी की अपनी यात्रा होती और अपने-अपने नियम. इस सफ़र में कुछ लोग साथ आते हैं, साथ चलते हैं. कुछ साथ छोड़ जातें हैं और कुछ जीवन भर साथ निभाते हैं. कुछ चाल चलते हैं. कुछ शह और मात दे जाते हैं कुछ अपनेपन से, कुछ खेल भावना से और कुछ राग, ईर्ष्या व द्वेष से खेलते हैं, शतरंज के खेल की तरह. पर यह भूल जातें हैं कि इस खेल में चले क़दम वापस नहीं होते. और हर क़दम होता है आईना उनके व्यक्तित्व का.

ज़िंदगी के रंग – 196
बहते बहते उम्र के बहाव में,
ज़िंदगी के बदलते पड़ाव में,
हर किसी को ज़िंदगी में,
उन्हीं कहानियों का सामना करना पड़ता है,
जो सनातन काल से शाश्वत है.
ज़िंदगी क्षण भंगुर है –
यह जानते हुए भी उलझ जातें हैं माया मोह में.
और जब यह मायावी स्वप्न टूटता है,
तब ख़्याल आता है – मृत्यु तो सब की आती है.
पर जीवन जीना कितने लोगों को आता है?

Cloud and Sunlight
This is how I would die into the love I have for you: as pieces of cloud dissolve in sunlight.

Rumi ❤️
Image courtesy- Aneesh
My 5th blog anniversary!


You must be logged in to post a comment.