रूह का सफ़र

ना गिन दौलत,

ना गिन माल-ओ-असबाब,

गिन बस अपनी साँसें,

और हर लम्हा अमल में ढाल.

रूह का सफ़र है,

बाक़ी सब फ़ना है!!!

2 thoughts on “रूह का सफ़र

  1. क्या ही सुंदर और गहरी पंक्तियाँ हैं!
    आपने कुछ ही शब्दों में ज़िंदगी का सार कह दिया—
    कि असली दौलत न सामान है, न प्रदर्शन,
    बल्कि हर साँस की जागरूकता और हर क्षण का सच्चा कर्म।

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