प्रार्थना

आँखें बंद कर हाथ जुड़ गए,

ऊपर वाले के सामने।

प्रार्थना करते हुए मुँह से निकला –

विधाता ! तुम दाता हो।

तुमसे प्रार्थना है –

जिसने मुझे जो, जितना दिया।

तुम उसे वह दुगना दो!

यह सुन ना जाने क्यों कुछ लोग नाराज़ हो गए।

 

12 thoughts on “प्रार्थना

  1. बहुत अच्छी और सारगर्भित बात कह दी रेखा जी आपने। दूसरों को सताने वाले तो ऐसी प्रार्थना से नाराज़ ही होंगे क्योंकि जो दिया, वही उनके पास लौटकर आएगा।

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    1. जितेंद्र जी मैं वास्तव में ईश्वर से यही प्रार्थना करती हूँ। मेरी बेटी की शादी में कुछ लोगों ने बिना माँगे मदद किया। तब भी दिल से यही निकला।
      पर क्या किया जाए जितेंद्र जी, जब दुआएँ भी किसी को बुरी लगे। अपना दिल साफ़ नहीं तब क्या किया जा सकता है।

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  2. जिसकी नजर जहाँ तक है वो वहीं तक देख सकता है।
    बहुत ही गहरी बात कही है आपने🙏😊

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