प्रकृति के नियम

जब फूल ना खिले।

फल ना हो।

फसल ना बढ़े।

तब मिट्टी, बीज, पानी को ठीक करते हैं,

जिसमें ये बढ़ते है।

या मौसम की कमियों की बातें करते है.

इंसानों अौर बच्चों के मामलों में,

ठीक विपरीत क्यों?

उन पर प्रकृति के ये नियम क्यों नहीं लागू होते?

 

 

 

 

गिरे-बिखरे कुछ लम्हे!

टूट कर गिरे-बिखरे कुछ लम्हे थे,

नज़रों के सामने।

जैसे हवा के झोंके से धरा पर बिखर अाईं,

फूलों की पंखुड़ियों।

कुछ भूले-बिसरे नज़ारें और कुछ यादें ,

जैसे कल की बातें हो।

आज सारे पल,

 अौर  सारी बीतीं घड़ियाँ पुरानी अौर अनजानी लगीं।

ऐसा दस्तूर क्यों बनाया है ऊपर वाले ने?