एक दिन आसमान इतना रोया
टपकते आँसुओं के गीलेपन
से दर्द भरा रंगीन इंद्रधनुष उग आया .

एक दिन आसमान इतना रोया
टपकते आँसुओं के गीलेपन
से दर्द भरा रंगीन इंद्रधनुष उग आया .

पत्थर पूजते -पूजते
बोली तो पत्थर सा
कठोर ना बनाओ.
फूल भी तो अर्पित करते हो ।

I am the dust in the sunlight,
I am the ball of the sun . . .
I am the mist of morning,
the breath of evening . . . .
I am the spark in the stone,
the gleam of gold in the metal . . . .
The rose and the nightingale
drunk with its fragrance.
I am the chain of being,
the circle of the spheres,
The scale of creation,
the rise and the fall.
I am what is and is not . . .
I am the soul in all.

अगर हम टूटे हैं तो क्या हुआ?
टूटे काँच की किरचियाँ हीरे सी चमकती हैं
पूरे काँच से ज़्यादा दमकतीं और रौशन होतीं हैं.

In response to – Alike me!
I glanced
At the shards of glass
So alike me!
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देखे है पर्वतों और खाइयों से लोग.
दोनों अपने आप में अलग हैं.
मदद करते औरों को ऊपर उठाते ..
एक अच्छाइयों की ऊँचाइयों पर ,
और कुछ लोग होते है खाइयों से .
बस किसी ना किसी को बिन बात
बिना कारण गिराने की कोशिश में.
सही भी तो है – जिसके पास जो है
वही तो दूसरों को दे सकते है.
ऐसे भी तो होते है कुछ लोग
सागर जैसे गहरे औ शीतल शांत.
ना जाने क्यों कुछ लगते हैं रेगिस्तान के
तपते जलाते शुष्क रूखे गर्म रेत से .
लोग वही लौटाते हैं जो उनके पास है .

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