कृष्णा, बुद्ध और रूमी

किसी ने कहा –

अजीब हो तुम

प्यार हैं – कृष्णा से , बुद्ध से और रूमी से भी ?

ज़रा भी इल्म नहीं हैं, /समझ नहीं हैं ?

अपनी ग़लतियों की ?

उम्रे दराज – चार दिन की हैं जिंदगानी.

/ चार दिन की हैं जिंदगी .

किसी एक पर ध्यान लगाओ ,

तुम्हें इतना सिखाना क्यों काम ना आया ?

इतनी नासमझी किस काम की ?

जवाब दिया –

बिन पूर्वाग्रह के कभी सच्चे मन से पढ़ कर देखो तो इन्हें .

जो जिंदगी की मुसलसल……सिलसिलेवार,

बहती धारा को कोई दिशा दे

मन को शीतलता दे ,

विचारों को सोच की चिंगारीं दे.

वह कबीर हो या साईं…..

कृष्णा, बुद्ध या रूमी

मस्तक तो अपने आप हीं झुक जाएगा.

 

 

 

 

22 thoughts on “कृष्णा, बुद्ध और रूमी

    1. अगर कृष्ण और रूमी पसंद हैं तब कबीर, साईं, बुद्ध सभी पसंद आएँगे . मैं इनके quotes पोस्ट करते रहती हूँ. ज़्यादा भारी किताबों से इन्हें पढ़ना शुरू मत करो. पहले इनकी छोटी छोटी कहानियाँ और प्रेरणा / सीख भरी बातें इंटेरनेट पर पढ़ो.
      कलिंग युद्ध विजयी सम्राट अशोक युद्ध विभीषिका से पराजित हो बौद्ध हो गए थे. कुछ तो गहराई देखी होगी उन्होंने बुद्ध की बातों में.

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    1. इतनी प्यारी गुज़ारिश के लिए प्यार और आभार. लिखना तो मेरा शग़ल हैं. ज़रूर लिखूँगी .

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