ज़िन्दगी के रंग -137

बहुत कुछ खोया है ज़िंदगी तेरे रह गुज़र में

अब तो सिर्फ़ हम हीं रह गए हैं

अपने आप को तेरे बजम में खोने के लिए.

12 thoughts on “ज़िन्दगी के रंग -137”

Leave a comment