जिंदगी जीना सीखा गए

कुछ गैर ऐसे मिले,

जो मुझे अपना बना गए।

कुछ अपने ऐसे निकले,

जो गैर का मतलब बता गए।

दोनो का शुक्रिया

दोनों जिंदगी जीना सीखा गए।

Unknown

11 thoughts on “जिंदगी जीना सीखा गए

  1. बहुत अच्छी और सही बात कही है रेखा जी आपने । वैसे ख़ुशकिस्मत ही कहे जाएंगे वे लोग जो ज़िंदगी के किसी-न-किसी मोड़ पर कुछ खोकर (या बहुत कुछ खोकर) ही सही, जीना सीख तो गए । मेरी हमदर्दी तो उनके साथ है जिन पर शाद अज़ीमाबादी साहब का यह शेर लागू होता है : ‘अब भी इक उम्र पे जीने का न अंदाज़ आया; ज़िंदगी छोड़ दे पीछा मेरा, मैं बाज़ आया’ ।

    Liked by 1 person

    1. ज़िन्दगी तो सिखाती ही रहती है . समझदार लोग तो जल्दी ही सीख भी जाते है और मेरे जैसे कुछ अनाड़ी वही के वहीं राह जाते है दुनियादारी सिखने में 😊 . शायद ऐसे ही लोगों के लिए यह शेर लिखा गया है . आपका हार्दिक आभार इस लाजवाब शेर के लिए .

      Liked by 1 person

Leave a reply to Rekha Sahay Cancel reply