
Google doodle honours Mrinalini Sarabhai on her 100 birth anniversary


आज हीं कहीं यह पढ़ा और सलाह कुछ अधूरी सी लगी इसलिए कुछ पंक्तियाँ जोड़ दी-
लम्हे फुर्सत के आएं तो, रंजिशें भुला देना दोस्तों,
किसी को नहीं खबर कि सांसों की मोहलत कहाँ तक है ॥
नई पंक्तियाँ
अच्छा हो रंजिशे पैदा करनेवाली आदतों को भुला देना ,
किसी को पता नहीं ये आदतें कहाँ तक चुभन पहुँचाएगी .
ना रंजिशे होंगी ना भुलाने की ज़रूरत .
ज़िंदगी और साँसों के मोहलत की गिनती की भी नहीं ज़रूरत.



Unknown

ढेरों बातें और यादें बटोरे
गिले-शिकवे की पोटलियाँ समेटे
इंतज़ार में, राहों में पलके बिछाये बैठे थे …..
उनका आना, नज़रें उठाना और गिराना
सारे ल़फ्ज ….अल्फाज़ चुरा ले गया।
Once you conquer your selfish self,
all your darkness will change to light.
Rumi ❤ ❤
you have to
keep breaking
your heart
until it opens.
Rumi ❤ ❤



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