When you look
For the Good in others,
You Discover
The Best in Yourself.
Unknown
Unknown

लोग जल जाते हैं मेरी मुस्कान पर क्योंकि
मैंने कभी दर्द की नुमाइश नहीं की.
जिंदगी से जो मिला कबूल किया
किसी चीज की कभी फरमाइश नहीं की,
मुश्किल है समझ पाना मुझे क्योंकि
जीने के अलग हैं अंदाज मेरे,
जब जहां जो मिला अपना लिया ,
ना मिला उसकी कभी ख्वाहिश नहीं.
Unknown
मुस्कुराते हुए जीना
भी जीने का है एक अन्दाज़ .
जितना मिला उसमें हीं जी लिए .
ख़्वाहिशो को भूल
चेहरे पर मुस्कुराहट रख
दर्द पी लिए .
फिर भी शिकायत
करने वालों को शिकायत है ,
क्यों तुम हँस कर जी लिए !!!!!

A boy asked the father: _What’s the size of God?_ Then the father looked up to the sky and seeing an airplane asked the son: What’s the size of that airplane? The boy answered: It’s very small. I can barely see it. So the father took him to the airport and as they approached an airplane he asked: And now, what is the size of this one? The boy answered: Wow daddy, this is huge! Then the father told him: God, is like this, His size depends on the distance between you and Him. *The closer you are to Him, the greater He will be in your life!

कुछ लम्हे गुजारे है,
मैंने भी अपने खास दोस्तो संग
लोग उन्हें वक़्त कहते है और
हम उन्हे जिंदगी कहते है .

Unknown
वो दुश्मन बनकर,
मुझसे जीतने निकले थे,
दोस्ती कर लेते,
तो मैं खुद ही हार जाती !!

Unknown
यह दुनिया निराली है .
राग -रंग, माया- मिथ्या
के बीच ,
कभी लगता है , सभी अपने है .
चारो ओर मेले ही मेले है .
कभी लगता है –
इस भरी दुनिया में तनहा है .
सब अकेले ही अकेले है .


सुविख्यात पंजाबी लेखिका अमृता प्रीतम जी को उनकी पुण्यतिथि पर शत् शत नमन .
रिश्ते पुराने होते हैं
पर “मायका” पुराना नही होता
जब भी जाओ …..
अलाय बलायें टल जाये
यह दुआयें मांगी जाती हैं
यहां वहां बचपन के कतरे बिखरे होते है
कही हंसी कही खुशी कही आंसू सिमटे होते हैं
बचपन का गिलास….कटोरी ….
खाने का स्वाद बढ़ा देते हैं
अलबम की तस्वीरें
कई किस्से याद दिला देते हैं
सामान कितना भी समेटू
कुछ ना कुछ छूट जाता है
सब ध्यान से रख लेना
हिदायत पिता की ….
कैसे कहूं सामान तो नही
पर दिल का एक हिस्सा यही छूट जाता है
आते वक्त माँ, आँचल मेवों से भर देती हैं
खुश रहना कह कर अपने आँचल मे भर लेती है ….
आ जाती हूं मुस्करा कर मैं भी
कुछ ना कुछ छोड कर अपना
रिश्ते पुराने होते हैं
जाने क्योँ मायका पुराना नही होता
उस देहरी को छोडना हर बार ….आसान नही होता।
– अमृता प्रीतम

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