मुझे आपकी इस बात से पूरा-पूरा इत्तफ़ाक़ है रेखा जी । बहुत-से शेर और नग़मे याद आ रहे हैं इस बात पर । अभी एक ही शेर का ज़िक्र कर रहा हूँ जो मुझे भुलाए नहीं भूलता : ‘मेरी ज़िंदगी इक मुसलसल सफ़र है, जो मंजिल पे पहुँचे तो मंजिल बढ़ा दी’ । और फ़िल्म ‘काला पत्थर’ का मशहूर नग़मा तो है ही : ‘इक रास्ता है ज़िन्दगी जो थम गए तो कुछ नहीं’ ।
Beautiful
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Thanks a lot 🙂 Paresh.
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Very true. 👌
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Thanks a lot 🙂 Prashasti.
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बहुत खूब
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आभार ! ! ! !
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मुझे आपकी इस बात से पूरा-पूरा इत्तफ़ाक़ है रेखा जी । बहुत-से शेर और नग़मे याद आ रहे हैं इस बात पर । अभी एक ही शेर का ज़िक्र कर रहा हूँ जो मुझे भुलाए नहीं भूलता : ‘मेरी ज़िंदगी इक मुसलसल सफ़र है, जो मंजिल पे पहुँचे तो मंजिल बढ़ा दी’ । और फ़िल्म ‘काला पत्थर’ का मशहूर नग़मा तो है ही : ‘इक रास्ता है ज़िन्दगी जो थम गए तो कुछ नहीं’ ।
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वाह ! ! ! ! ! उम्दा …. क्या खूब पंक्तियाँ है . कुछ हीं शब्द सब कुछ कह जाते है . बहुत आभार .
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एक रास्ते पर चलो तो मंजिल मिल जाये
रास्ते कई हों तो हम खुद ही भटक जांयें
मंजिल मिलना तो दूर की बात है
पहले रास्ते का तो पता कर लो ।
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इन खूबसूरत पँक्तियों के लिये बहुत आभर .😊
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