ख्वाहिशें थम जाएं

रास्ते कहां खत्म होते हैं ज़िन्दगी के सफ़र में…

मंज़िल तो वही है जहां ख्वाहिशें थम जाएं…!!

 

 

Unknown

10 thoughts on “ख्वाहिशें थम जाएं

  1. मुझे आपकी इस बात से पूरा-पूरा इत्तफ़ाक़ है रेखा जी । बहुत-से शेर और नग़मे याद आ रहे हैं इस बात पर । अभी एक ही शेर का ज़िक्र कर रहा हूँ जो मुझे भुलाए नहीं भूलता : ‘मेरी ज़िंदगी इक मुसलसल सफ़र है, जो मंजिल पे पहुँचे तो मंजिल बढ़ा दी’ । और फ़िल्म ‘काला पत्थर’ का मशहूर नग़मा तो है ही : ‘इक रास्ता है ज़िन्दगी जो थम गए तो कुछ नहीं’ ।

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    1. वाह ! ! ! ! ! उम्दा …. क्या खूब पंक्तियाँ है . कुछ हीं शब्द सब कुछ कह जाते है . बहुत आभार .

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  2. एक रास्ते पर चलो तो मंजिल मिल जाये
    रास्ते कई हों तो हम खुद ही भटक जांयें
    मंजिल मिलना तो दूर की बात है
    पहले रास्ते का तो पता कर लो ।

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