ये धुंध कुहासा छंटने दो
रातों का राज्य सिमटने दो
प्रकृति का रूप निखरने दो
फागुन का रंग बिखरने दो,
प्रकृति दुल्हन का रूप धर
जब स्नेह – सुधा बरसायेगी
शस्य – श्यामला धरती माता
घर -घर खुशहाली लायेगी,
तब चैत्र-शुक्ल की प्रथम तिथि
नव वर्ष मनाया जायेगा
आर्यावर्त की पुण्य भूमि पर
जय-गान सुनाया जायेगा…
नव संवत्सर १८.०३.२०१८

नव वर्ष और नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएं।
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बहुत आभार !!!
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Dinkar jee kaa koi saani hai …..
Ye kamaal ke #kavi the…
Poem share krne ke
….Thanx
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ji bilkul thik kahaa aapne. Wpka swagat hai apne vichar share karne ke liye.
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