एक आदत सी थी,
बेफिक्री से गुनगुनाने और मुस्कुराने की।
सुनहरी सुबह और रुपहली शाम की ,
खूबसूरती में ङूब जाने की।
पर ज़माने ने इसमें भी कमियां निकाल दी।
तब ख्याल आया,
अब तो
खूबियों के सिवा कुछ बचा हीं नहीं ।
हाथ जुङ गये इबादत में।
When the world pushes you to your knees, you’re in the perfect position to pray.
~ Rumi