कस्तूरी मृग- कविता Musk deer

Musk deer is  famous for the valuable scented musk found  in its navel. Their musk is used for making perfumes and medicines.  It is  believed that musk deers look for the fragrance of musk everywhere outside instead of  looking for it within themselves.

 

“I searched for God and found only myself.

I searched for myself and found only God”.

 

 

वन-वन ढूंढ रहा है

मृग अपनी कस्तूरी,

खुशबू  अपने पास है,

बस है खुद से खुद की दूरी।

 

 

कस्तूरी कुन्डल बसे, मृग ढूढै बन माहि ।

ऐसे घट-घट राम हैं, दुनिया देखे नाहि।।

कबीर

 

कस्तूरी मृग अपनी नाभि में पाए जाने वाली कस्तूरी के लिए  प्रसिद्ध है। कस्तूरी का उपयोग औषधि के रूप में दमा, मिर्गी, निमोनिया आदि की दवाअों में होता है। यह  अपनी खुशबूदार इत्र के लिए भी प्रसिद्ध है। कहते है , वह कस्तूरी की खुशबू की खोज में  भटकता रहता है, जो उसके हीं अंदर होता है।

Musk deer

 

55 thoughts on “कस्तूरी मृग- कविता Musk deer

  1. कस्तूरी कुन्डल बसे, मृग ढूढै बन माहि ।

    ऐसे घट-घट राम हैं, दुनिया देखे नाहि।।

    😊😊😊😊😊👌👌👍👍👍👍👍🙏🙏🙏🙏🙏

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    1. मैं ठीक हूँ. आप कैसे है? आप बहुत अच्छा लिखते है. मैं काफी पहले से आपकाब्लॉग पड़ रहीं हूँ.

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  2. रेखा जी एक लेखक का काम ही एक अच्छा लेख लिखना ।।ओर आपने इस इस काबिल समझा धन्यवाद।।।।।आगे भी आप को इस तरह के ओर भी अच्छे 2 मिलेगे ।।।

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  3. वेसे मेने अभी दो महिला प्रधान स्टोरी लिखी है ।।जब वो पूरी तरह से coomplit हो जायेगी तो जरूर शेयर करूँगा

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    1. सच के मामले में मैंने गाँधी का दामन थामा |
      और कब दुनिया झूठी हुई , पता ही न चला ||

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  4. मैंने नहीं
    खोजे गए
    मेरी आत्मा
    मुझे रखती है
    मेरे जीवन में
    सभी समय
    गले लगा लिया

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  5. बचपन से
    मैं कोशिश करता हूं
    मेरे साथ
    स्वयं
    भरोसा
    बनना

    अजनबी
    अंदर
    है
    मुझे
    एक रहस्य रह गया

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