दिवाली अौर मोमबत्ती कविता, Diwali N candle-spiritual poem


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अंधेरे में जल उठी छोटी सी  मोमबत्ती,

रोशन कर दिया जहाँ।

सारा अंधकार तिरोहित हो गया।

दिल में ख्याल आया -मोमबत्ती बन जाऊँ।

सभी को राह दिखाँऊ……….

खुशी अौर रौशनी बिखेरूँ ,

                      मोमबत्ती मेरी बात सुन हँस पङी अौर बोली –

क्या अपने दिल को जला  कर आसूँ बहा  सकोगी?

अपने को तपा अौर गला सकोगी?

पवन  के झूमते थपेङों से अपने को बचा सकोगी?

तभी दिवाली होगी।

तभी रौशन होगा यहाँ अौर सारा जहाँ।

image from internet.

51 thoughts on “दिवाली अौर मोमबत्ती कविता, Diwali N candle-spiritual poem

  1. मोमबत्ती मेरी बात सुन हँस पङी अौर बोली –
    क्या अपने दिल को जला कर आसूँ बहा सकोगी?
    अपने को तपा अौर गला सकोगी?
    पवन के झूमते थपेङों से अपने को बचा सकोगी?
    तभी दिवाली होगी।
    तभी रौशन होगा यहाँ अौर सारा जहाँ।
    बहुत शानदार ! मोमबत्ती बन पाना आसान कहाँ होता है ?

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  2. बहुत अच्छी कविता है रेखा जी । लेकिन दूसरों को प्रकाश देने की अभिलाषा रखने वाले को स्वयं जलने के लिए तो तत्पर रहना ही चाहिए । जलना तो उसकी नियति ही है । एक शेर याद आ रहा है :
    बुझा है दिल भरी महफ़िल को रोशनी देकर
    मरूंगा भी तो हज़ारों को ज़िंदगी देकर
    एक बहुत पुराना हिन्दी फ़िल्मी गीत भी याद आ रहा है जिसकी बीच की पंक्तियाँ हैं :
    मेरी रातों में जलाए तेरे जलवों ने चराग़
    तेरी रातों के लिए दिल को जलाया हमने
    आपको एवं आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं ।

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    1. आपकी बात बिलकुल सही है। आप के
      तारीफ का अंदाज हमेशा हीं बङा निराला
      अौर खुबसूरत होता है। सुंदर गीत अौर शेर
      के लिये शुक्रीया। आपको अौर आपके
      अपनों को भी दिवाली की अग्रिम शुभकामनायें।

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    2. आपकी बात बिलकुल सही है। आप के
      तारीफ का अंदाज हमेशा हीं बङा निराला
      अौर खुबसूरत होता है। सुंदर गीत अौर शेर
      के लिये शुक्रीया। आपको अौर आपके
      अपनों को भी दिवाली की अग्रिम शुभकामनायें।

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  3. वाजिब लिखा, मोमबत्ती के भांति स्वयं को तिरोहित करने का भाव सहज ही कवित्व को प्रकट करता है💐💐

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