मेरा ब्लॉग –“नरेटिवे ट्रांसपोटेशन ” या “परिवहन कल्पना मॉडल” के नाम से है।नाम कुछ अलग सा है। इसलिए मैं इस बारे में कुछ बातें करना चाहूंगी।
कभी-कभी हम किसी रचना को पढ़ कर उसमें डूब जाते हैं। उसमें खो जाते हैं। उस में कुछ अपना सा लगने लगता है।
ऐसी कहानी या गाथा जो आप को अपने साथ बहा ले जाये। इसे “कथा परिवहन अनुभव” या “नरेटिवे ट्रांसपोटेशन कहते हैं। यह एक मनोवैज्ञानिक मनः स्थिति होती है।
मैं चाहती हूँ कि मेरे रचनाओं को पढ़ने वाले पाठक भी ऐसा महसूस करें। इसमें हीं मेरे लेखनी की सार्थकता है। शब्दों का ऐसा मायाजाल बुनना बहुत कठिन काम है। फिर भी मैं प्रयास करती रहती हूँ। अगर मेरा यह प्रयास थोड़ा भी पसंद आए। तब बताएं जरूर। यह मेरा हौसला बढ़ाएगा।


Bahut khoob Rekhaji, aapka lekhan prabhavshali hai, infact am sure a lot of us learn from you ma’am! 🙂
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हॅलो अर्चना जी, आपके हौसला अफजाई के लिए बहुत धन्यवाद।
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main apki bahot si blog padta hu . anek vicharon ki alochana apne bheetar karta hu . aur ap jo likhti hain unme kai saare seekhne wali baatein hoti hain aur kai anubhav karne layak cheeze hoti hain .
isiliye ache lagte hain . likhte rahiye aise hi 🙂
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thank u very much for such inspiring comments.
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i would like to read more of your articles.. 🙂
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you are most welcome। आपके मन में मेरे किसी लेख के लिए आलोचनाएँ हो तो जरूर बताइएगा। . मुझे अपना लेखन सुधारने में मदद मिलेगा।
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