पलक झपकते कभी कभी
कितना कुछ बदल जाता है .
कभी मन आँखों के रास्ते
बरस जाता है.
कभी आसमान के आँसू
बरसात बन बरस जाते है.
इन्हें पन्ने पर उतारने की कोशिश …..
शब्दों में बाँधने की हर कोशिश
बहा ले जाती है ये बरसाती बूँदे……

पलक झपकते कभी कभी
कितना कुछ बदल जाता है .
कभी मन आँखों के रास्ते
बरस जाता है.
कभी आसमान के आँसू
बरसात बन बरस जाते है.
इन्हें पन्ने पर उतारने की कोशिश …..
शब्दों में बाँधने की हर कोशिश
बहा ले जाती है ये बरसाती बूँदे……

समंदर ने पैरों के पास
अपने झागो के साथ
कुछ सीपियाँ ऐसे
ला कर
छोड़ गया ,
जैसे कुछ लौटा रहा है.
ज़िंदगी भी अक्सर बड़ी मासूमियत से
बहुत कुछ अचानक लौटा देती है.
ठीक ही कहते है ,
जो दो वह लौट कर ज़रूर आता है .

ना करना चाहो तो हजार बहाने है ……
करने वाले कर जातें है बिना कुछ कहे -सुने.

ऐ उम्र !
कुछ कहा मैंने,
पर शायद तूने सुना नहीँ..!
तू छीन सकती है बचपन मेरा,
पर बचपना नहीं..!!
हर बात का कोई जवाब नही होता…,
हर इश्क का नाम खराब नही होता…!
यूं तो झूम लेते है नशे में पीनेवाले….,मगर हर नशे का नाम शराब नही होता…!
खामोश चेहरे पर हजारों पहरे होते है….!
हंसती आखों में भी जख्म गहरे होते है….!
जिनसे अक्सर रुठ जाते है हम,*
असल में उनसे ही रिश्ते गहरे होते है….!
किसी ने खुदा से दुआ मांगी.!
दुआ में अपनी मौत मांगी,
खुदा ने कहा, मौत तो तुझे दे दु मगर…!
उसे क्या कहु जिसने तेरी जिंदगी मांगी…!
हर इंन्सान का दिल बुरा नही होता….!
हर एक इन्सान बुरा नही होता.
बुझ जाते है दीये कभी तेल की कमी से….!
हर बारकुसुर हवा का नही होता.. !!

–गुलजार
लूट कर मासूम की आबरू,
जालिमों तुम्हे नींद कैसे आई होगी।
तुमने तड़पा कर उस खिलते फूल को,
अपनी बेटियों से कैसे नज़र मिलाई होगी।।
कसूर क्या था शायद कोई खता नहीं थी,
कलेजा नहीं फटा जब वो चिल्लाई होगी।
तुम इतने बेरहम कैसे बन गए ऐ दरिंदो,
सोचता हूं शायद तालीम ही ऐसी पाई होगी।।
#justiceforourchild

लोग जल जाते हैं मेरी मुस्कान पर क्योंकि
मैंने कभी दर्द की नुमाइश नहीं की.
जिंदगी से जो मिला कबूल किया
किसी चीज की कभी फरमाइश नहीं की,
मुश्किल है समझ पाना मुझे क्योंकि
जीने के अलग हैं अंदाज मेरे,
जब जहां जो मिला अपना लिया ,
ना मिला उसकी कभी ख्वाहिश नहीं.
Unknown
सुविख्यात पंजाबी लेखिका अमृता प्रीतम जी को उनकी पुण्यतिथि पर शत् शत नमन .
रिश्ते पुराने होते हैं
पर “मायका” पुराना नही होता
जब भी जाओ …..
अलाय बलायें टल जाये
यह दुआयें मांगी जाती हैं
यहां वहां बचपन के कतरे बिखरे होते है
कही हंसी कही खुशी कही आंसू सिमटे होते हैं
बचपन का गिलास….कटोरी ….
खाने का स्वाद बढ़ा देते हैं
अलबम की तस्वीरें
कई किस्से याद दिला देते हैं
सामान कितना भी समेटू
कुछ ना कुछ छूट जाता है
सब ध्यान से रख लेना
हिदायत पिता की ….
कैसे कहूं सामान तो नही
पर दिल का एक हिस्सा यही छूट जाता है
आते वक्त माँ, आँचल मेवों से भर देती हैं
खुश रहना कह कर अपने आँचल मे भर लेती है ….
आ जाती हूं मुस्करा कर मैं भी
कुछ ना कुछ छोड कर अपना
रिश्ते पुराने होते हैं
जाने क्योँ मायका पुराना नही होता
उस देहरी को छोडना हर बार ….आसान नही होता।
– अमृता प्रीतम

अपनी कीमत उतनी रखिए
जो अदा हो सके
ना कम ना ज़्यादा.
अगर बेमोल हो गए तो
कोई नहीं पूछेगा और
अगर अनमोल हो गए
तो तन्हा हो जाओगे. !

जो हो इक बार वो हर बार हो, ऐसा नहीं होता
हमेशा एक ही से प्यार हो, ऐसा नहीं होता
कहीं कोई तो होगा जिसको अपनी भी ज़रूरत हो
हर इक बाज़ी में दिल की हार हो, ऐसा नहीं होता.
( सधन्यवाद जितेंद्र माथुर जी के कविता संकलन से प्राप्त रचना )

कोई चाहे ना चाहे ,
तुम तो चाहो अपने आप को .
किसी और की नज़र में अपना मोल तौलने से पहले अपना मोल तो समझो .
वरना ज़िंदगी निकल जाएगी मोल-तोल
चाहने ना चाहने की जद्दो जहद में . 
You must be logged in to post a comment.