एक टुकड़ा ज़िंदगी का
बानगी है पूरे जीवन के
जद्दोजहद का .
उठते – गिरते, हँसते-रोते
कभी पूरी , कभी स्लाइसों
में कटी ज़िंदगी
जीते हुए कट हीं जाती है .
इसलिए मन की बातें
और अरमानों के
पल भी जी लेने चाहिये.
ताकि अफ़सोस ना रहे
अधूरे हसरतों ….तमन्नाओं …. की.






Unknown
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