तांडव #Covid19 April 16, 2021April 16, 2021 Rekha Sahay12 Comments कहते हैं जीवन के अंतिम सत्य का एहसास श्मशान में होता है। सचमुच यह सत्य महसूस हुआ बाँस घाट श्मशान के पास से गुजरते हुऐ, अौर काशी में मणिकर्णिका घाट की अविराम जलतीं चितायें देख कर। मोक्ष की आकांक्षा से खिंचे चले आते हैं लोग काशी। अौर चिता की अग्नि धधकती रहती है इस महाश्मशान में। एक चिता की अग्नि बुझे ना बुझे धधक उठतीं हैं दूसरी चिता की लाल-पीली लपटें । आज रोज़ मिल रहीं हैं किसी ना किसी के निर्वाण की दुखद खबरें। बन गईं हैं सारी श्मशानें, महाश्मशान, …. …निरंतर जलती, हवा में अजीब गंध बिखेरती। थके व्यथित परिजन अस्पताल, ईलाज़, ऑक्सीजन , दवा की लाइनों के बाद पंक्ति बना रहें गुजरे स्वजनों के अंतशय्या के लिये मसानों में। बिजली और गैस शव दाह गृह, क्रेमाटोरियम की दीवारें, भट्टियां, लोहे गल रहे अनवरत जलती अपनी हीं आग में । क्या यह संहारक शिव का तांडव है? या जल रहें हैं हम सब मानव, मानवता अौर नैतिकता भूल अपनी हीं गलतियों के आग में? Rate this:Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Share on Pinterest (Opens in new window) Pinterest Share on Tumblr (Opens in new window) Tumblr Share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn Share on Pocket (Opens in new window) Pocket Share on Reddit (Opens in new window) Reddit Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Like Loading...
You must be logged in to post a comment.