कैक्टस Cactus

रेत पर, तपते  रेगिस्तान में

खिल आये कैक्टस

ने बिना ङरे

 चटक रंगों को बिखेरा।

किसी ख़ूबसूरत नज़्म या कविता की तरह ……

गर्म बयार अौर

आग उगलते सूरज

ने  नन्हे से कैक्टस के हौसले देख

नज़रें झुका  ली ।

 

जिंदगी के रंग ( कविता) 8

life

जिंदगी ने ना जाने कितने रंग बदले।

रेगिस्तान  के रेत की तरह

कितने निशां बने अौर मिटे

हर बदलते रंग को देख ,

दिल में तकलिफ हुई।

काश,  जिंदगी इतनी करवटें  ना ले।

पर , फिर समझ आया ।

यही तो है जिंदगी।