आज वही कल है,
जिस कल
की फिक्र
तुमने
कल की थी।
Anonymous.
Anonymous.
इन परिंदों की उङान देख,
चहचहाना सुन ,
रश्क होता है।
कितने आज़ाद हैं……
ना बंधन, ना फिक्र कि …….
कौन सुनेगा ….क्या कहेगा…….
बस है खुली दुनिया अौर आजाद जिंदगी।
गगन से झुक कर पूछा चाँद ने
क्यों आँसू बहा रहे हो?
सामना करो कठिनाईयों का
किसी को फिक्र नहीं तुम्हारे अश्रुयों की ।
लोग इन पर कदम रखते गुजर जायेंगें।
क्योकिं
जिन पर तुम्हारे कदम पङे हैं
वे अोस नहीं मेरे अश्क हैं।