
आइने की फ़ितरत



यह तो वक़्त वक़्त की बात है।
टिकना हमारी फ़ितरत नहीं।
हम तो बहाव ही ज़िंदगी की।
ना तुम एक से रहते हो ना हम।
परिवर्तन तो संसार का नियम है।
पढ़ लो दरिया में
बहते पानी की तहरीरों को।
बात बस इतनी है –
बुरे वक़्त और दर्द में लगता है
युग बीत रहे और
एहसास-ए-वक़्त नहीं रहता
सुख में और इश्क़ में।
लोग नहीं बदलते।
फ़रेबी अक्सर धोखे-बाज़ साबित होतें हैं।
वस्ल का वादा करतें है
लेकिन कभी वफ़ा नहीं करतें।
कभी दोस्त, कभी माशूक़ ,
कभी अपना… करीबी बन,
दिखा देतें हैं अपनी फ़ितरत।
अक्सर लोग नहीं बदलते।
