एक उलझन नहीं सुलझ रही।
हैं ज़िंदगी ख़्वाबों में मसरूफ़,
ख़्वाबों की इबादत में मसरूफ़।
है ख़ूबसूरत नशीला वसंत,
कहकशाँ,, चाँद-तारो भरी रातें।
नींद भरी आँखें अपनी
दर्द भरी कहानी किसे सुनायें?

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एक उलझन नहीं सुलझ रही।
हैं ज़िंदगी ख़्वाबों में मसरूफ़,
ख़्वाबों की इबादत में मसरूफ़।
है ख़ूबसूरत नशीला वसंत,
कहकशाँ,, चाँद-तारो भरी रातें।
नींद भरी आँखें अपनी
दर्द भरी कहानी किसे सुनायें?

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मन के अंधेरे को दूर करने के लिए,
आशा का इक चराग़ काफ़ी है।
हौसले की कौंधती बिजली,
कुछ उम्मीद की किरणें
शीतल चाँद की चाँदनी काफ़ी हैं।
कितनी भी अँधेरी रात हो,
रौशन करने को इक आफ़ताब काफ़ी है।
मन के अंधेरा दूर करने के लिए
मन में, टिमटिमाते सितारे सा उल्लास काफ़ी है।
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