
जीते अपने हार से!



सब खो दिया।
अब क्यों डरें?
कुछ और अब
ना चाहिए।
वरना फिर डरना
सीख जाएँगें।

इस दुनिया के मेले में,
लोगों को खोने से
परेशान न हो।
सब को खुश करने की
कोशिश में ,
रोज़ एक मौत ना मरो।
एक बात सीख लो!
खुद को खो कर खोजने और
संभलने में परेशानी बहुत है।
