“ज़िंदगी के रंग” my poem book
इस नाम से, बरसों से मैं कविताएं लिखती आ रही हूँ। मेरे लिये खुशी की बात है कि मुझे अपनी कविताओं को पुस्तक रूप देने का अवसर मिला। इस किताब में मैंने अपनी नई कविताओं के साथ कुछ पुरानी कविताएं भी डाली है। आशा है, आप लोगों को यह कविता संग्रह पसंद आएगी। आप इसे नीचे दिए गए लिंक पर पढ़ सकते हैं और अगर चाहे, अब आप इसे दिए गए पब्लिकेशन लिंक पर ऑर्डर भी कर सकते हैं। अगर आप में से कोई मेरी इस किताब का रिव्यू करना चाहे तो मुझे बताएं। मुझे इससे बड़ी खुशी होगी।
इस पुस्तक के छपने की यात्रा में मदद के लिए आशीष/ शैंकी, रिव्यू लिखने के लिए स्मिता सहाय पुस्तक के कवर पृष्ठों पर तस्वीरों के लिए चांदनी सहाय की तहे दिल से आभारी हूं।

ज़िंदगी बङी सख़्त और ईमानदार गुरु है.
अलग-अलग तरीक़े से पाठ पढ़ा कर इम्तिहान लेती है…..
और तब तक लेती है,
जब तक सबक़ सीख ना जाओ.
अभी का परीक्षा कुछ नया है.
रिक्त राहें हैं, पर चलना नहीं हैं.
अपने हैं लेकिन मिलना नहीं है.
पास- पड़ोस से घुलना मिलना नहीं है.
इस बार,
अगर सीखने में ग़लती की तब ज़िंदगी पहले की तरह पाठ दुहराएगी नहीं …
और फिर किसी सबक़ को सीखने की ज़रूरत नहीं रह जाएगी.
कोरोना के टेस्ट में फ़ेल होना हीं पास होना है.
पर किसी के पास-पास नहीं होना है.
ज़िंदगी की परेशान घड़ियों में अचानक
किसी की बेहद सरल और सुलझी बातें
गहरी समझ और सुकून दे जातीं हैं, मलहम की तरह।
किसी ने हमसे कहा – किसी से कुछ ना कहो, किसी की ना सुनो !
दिल से निकलने वाली बातें सुनो,
और अपने दिल की करो।
गौर से सुना, पाया……
दिल के धड़कन की संगीत सबसे मधुर अौर सच्ची है।
हौसले जीत से नहीं बढ़ते .
परेशानियों से डरे बिना ,
उन को हराने से बढ़ते हैं .
ज़िंदगी में हमें दूसरों को हराने की नहीं
अपने आप से जीतने से आदत होनी चाहिये.

यह कविता किसी अपने के लिये जो दिल के बहुत करीब है।
Image courtesy – Monica
कहते है – यह ज़िंदगी बुलबुला है.
पर जीवन के रंगमंच पर
ना तो इसे फूँक मार
अस्तित्व मिटाया जा सकता है
ना नियति के झोंके से
बचाया जा सकता है .
हम सब किसी और की
ऊँगलियों से बँधे,
नियंता के हाथों
की कठपुतलिया हैं.
और सब जानते – समझते भी
ज़िंदगी और मौत का रंग
अंदर तक हिला जाता है……….
…
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