अपनी ज़िंदगी कब जियोगे?

लोग क्या कहेंगे?

अगर सुन रहे हो लोगों की।

तब जी रहे हो उनकी ज़िंदगी,

उनकी बातें,

उनकी ख्वाहिशें।

अपनी ज़िंदगी कब जियोगे?

ख्वाब

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Life  is a journey not a destination !!!!

 

जीवन  एक यात्रा है,

मंजिल नहीं।

 इस  यात्रा में खुशियाँ   ….बाधाएं…  आती जाती हैं।

यही  जिंदगी हैं।

    इस  लेखन यात्रा  में 

कभी मन की पीङा, कभी खुशियाँ

 आप सबों से बाँटतें बाँटतें  

 तीन साल गुजर गये …. पता हीं नहीं चला।

  आज यह ब्लॉग और मेरे ब्लॉगर मित्र

मेरे  लिये  खजाना  – अनमोल  निधि हैं।