लोगों की ओर जल कर गिरते, बिखेरते आतिशो ने,
रावण से पूछा ये क्या कर डाला?
जवाब मिला –
तुम सब युगों-युगों से जला रहे है मुझे।
मैंने भी वही किया, तो बुरा क्यों मान गए?
सामने राम तो नज़र आए नहीं कहीं।
पर छुपे थे कईयों के अंदर अंश हमारे, कई रावण।

लोगों की ओर जल कर गिरते, बिखेरते आतिशो ने,
रावण से पूछा ये क्या कर डाला?
जवाब मिला –
तुम सब युगों-युगों से जला रहे है मुझे।
मैंने भी वही किया, तो बुरा क्यों मान गए?
सामने राम तो नज़र आए नहीं कहीं।
पर छुपे थे कईयों के अंदर अंश हमारे, कई रावण।

इसे इबादत कहें या डूबना?
ज़र्रे – ज़र्रे को रौशन कर
क्लांत आतिश-ए-आफ़ताब,
अपनी सुनहरी, पिघलती, बहती,
रौशन आग के साथ डूब कर
सितारों और चिराग़ों को रौशन होने का मौका दे जाता है.

अर्थ:
आफ़ताब-सूरज
आतिश – आग
इबादत-पूजा
क्लांत –थका हुआ
You must be logged in to post a comment.