इनायत

इनायत

अँधेरे पल हो या उजाले,

ज़िंदगी की सारी लड़ाईयाँ

हम ने तुम्हारे भरोसे लड़ी,

तुम्हारी रज़ा और

इनायत के साये में।

ना किया तुमने

कभी कोई वादा,

पर दर्मियान हमारे-तुम्हारे

भरोसे का वो रिश्ता है

कि तुमने कभी

निराश नहीं किया।

चाँद मिला राहों में….

एक दिन, चाँद मिला राहों में.

पूछा उसने – इतनी रात में अकेले ?

तुम्हें अँधेरे से डर नहीं लगता क्या ?

जवाब दिया हमनें – तुम भी तो अकेले हो,

स्याह रातों में…..

तुमसे हीं तो सीखा है,

अँधेरे में भी हौसले से अकेले रहना.