महाकालेश्वर उज्जैन (ज्योतिर्लिंग 3 )

तीसरा ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर है। यह क्षिप्रा नदी के किनारे, मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है। प्राचीन ग्रन्थों में उज्जैन को उज्जयिनी तथा अवन्तिकापुरी के नाम से भी जाना जाता है। श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग रुद्रसागर ताल के बगल में स्थित है। उज्जैन में प्रत्येक बारह वर्ष पर महाकुम्भ का आयोजन होता है। भव्य और दक्षिणमुखी होने के कारण महाकालेश्वर महादेव को अत्यन्त सिद्ध और तांत्रिक महत्व का माना जाता है।

इस ज्योतितिर्लिंग की एक और विशेषत है।यहाँ प्रात:काल की पूजा में अनिवार्य रूप से सवा मन श्मशान के चिता भस्म द्वारा अभिषेक किया जाता है। इस भस्म आरती में सम्मिलित होना पुण्यदायी माना जाता है। इसके लिए विशेष टिकट की व्यवस्था है।

पौराणिक कथा

1 शिव पुराणनानुसार, भगवान ब्रह्मा और विष्णु में कौन श्रेष्ठ है, यह जानने के लिए उज्जैन में शिव जी ने विशाल ज्योति का अंतहीन स्तंभ बना दिया और भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को दो दिशाओं में प्रकाश के अंत को खोजने के लिए भेजा। विष्णु ने हार स्वीकार कर ली पर ब्रह्मा ने झूठ बोल दिया। शिव ने नाराज़ ब्रह्माजी को को शाप दिया कि पूजा विधानों में उनका स्थान नहीं रहेगा।। ऐसी मान्यता है कि शिव द्वारा स्थापित ज्योती स्तंभ स्थान पर उज्जैन में ज्योतिर्लिंग स्थापित है।

2 दूसरी किवदंती एक शिव भक्त ब्राह्मण और उसके चार पुत्रों के बारे में है। जो इस स्थान पर सर्वदा पिनाकी या शिव के पार्थिव लिंग की पूजा करते थे। शिव ने साक्षात प्रकट हो कर दूषण नामक असुर से इस परिवार की रक्षा की। उन्हें महाकाल शिव ने हमेशा अपने वहाँ विराजमान होने का वर दिया। इस प्रकार यह भगवान शिव की स्थली बन गई और भगवान शिव महाकालेश्वर के नाम से प्रसिद्ध हुए।

3 तीसरी कथानुसार, उज्जयिनी नगरी में महान शिवभक्त चन्द्रसेन नामक एक राजा थे। शिवजी के पार्षद, मणिभद्र जी उन्हें महामणि कौस्तुभ मणि प्रदान किया। सूर्य के समान देदीप्यमान, मंगल प्रदान करनेवाली मणी को पाने के लालच में सभी पड़ोसी राजाओं ने उज्जयिनी पर हमला कर दिया। पर उज्जयिनी के एक छोटे से बालक में भी शिव भक्ती की गहराई देख उन्होने शत्रुता त्याग मित्रता कर लिया। भगवान महेश्वर की कृपा पाने के लिए उन्होंने भी वहाँ महाकालेश्वर का पूजन किया।

मान्यता है कि, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का दर्शन करने से स्वप्न में भी किसी प्रकार का दुःख अथवा संकट नहीं आता है। जो कोई भी मनुष्य सच्चे मन से महाकालेश्वर लिंग की उपासना करता है, उसकी सारी मनोकामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं और वह परलोक में मोक्षपद को प्राप्त करता है-

महाकालेश्वरो नाम शिवः ख्यातश्च भूतले।
तं दुष्ट्वा न भवेत् स्वप्ने किंचिददुःखमपि द्विजाः।।
यं यं काममपेदयैव तल्लिगं भजते तु यः ।
तं तं काममवाप्नेति लभेन्मोक्षं परत्र च।।

ज्योतिर्लिंग – पुराणों के अनुसार शिवजी जहाँ-जहाँ स्वयं प्रगट हुए उन बारह स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। हिंदु मान्यतानुसार इनके दर्शन, पूजन या प्रतिदिन प्रात:काल और संध्या के समय इन बारह ज्योतिर्लिङ्गों का नाम लेने मात्र से सात जन्मों का पाप नष्ट हो जाता है।
शिव पुराण – शिव पुराण, कोटि ‘रुद्रसंहिता’ में इस प्रकार बारह ज्योतिर्लिंगों की चर्चा है, जिसमें सोमनाथ का वर्णन प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में किया गया है।

सौराष्ट्रे सोमनाथंच श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोंकारं परमेश्वरम्।।
केदारं हिमवत्पृष्ठे डाकियां भीमशंकरम्।
वाराणस्यांच विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।।
वैद्यनाथं चिताभूमौ नागेशं दारूकावने।
सेतूबन्धे च रामेशं घुश्मेशंच शिवालये।।
द्वादशैतानि नामानि प्रातरूत्थाय यः पठेत्।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति।।
यं यं काममपेक्ष्यैव पठिष्यन्ति नरोत्तमाः।
तस्य तस्य फलप्राप्तिर्भविष्यति न संशयः।।

अर्थात – सौराष्ट्र प्रदेश (काठियावाड़) में श्रीसोमनाथ, श्रीशैल पर श्रीमल्लिकार्जुन, उज्जयिनी (उज्जैन) में श्रीमहाकाल, ॐकारेश्वर अथवा अमलेश्वर, परली में वैद्यनाथ, डाकिनी नामक स्थान में श्रीभीमशङ्कर, सेतुबंध पर श्री रामेश्वर, दारुकावन में श्रीनागेश्वर, वाराणसी (काशी) में श्री विश्वनाथ, गौतमी (गोदावरी) के तट पर श्री त्र्यम्बकेश्वर, हिमालय पर केदारखंड में श्रीकेदारनाथ और शिवालय में श्रीघुश्मेश्वर। जो मनुष्य प्रतिदिन प्रात:काल और संध्या के समय इन बारह ज्योतिर्लिङ्गों का नाम लेता है, उसके सात जन्मों का किया हुआ पाप इन लिंगों के स्मरण मात्र से मिट जाता है।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (ज्योतिर्लिंग 2 )

 

ज्योतिर्लिंग – पुराणों के अनुसार शिवजी जहाँ-जहाँ स्वयं प्रगट हुए उन बारह स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। हिंदु मान्यतानुसार इनके दर्शन, पूजन या प्रतिदिन प्रात:काल और संध्या के समय इन बारह ज्योतिर्लिङ्गों का नाम लेने मात्र से सात जन्मों का पाप नष्ट हो जाता है।

शिव पुराण – शिव पुराण, कोटि ‘रुद्रसंहिता’ में इस प्रकार बारह ज्योतिर्लिंगों की चर्चा है, जिसमें सोमनाथ का वर्णन प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में किया गया है।

सौराष्ट्रे सोमनाथंच श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोंकारं परमेश्वरम्।।
केदारं हिमवत्पृष्ठे डाकियां भीमशंकरम्।
वाराणस्यांच विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।।
वैद्यनाथं चिताभूमौ नागेशं दारूकावने।
सेतूबन्धे च रामेशं घुश्मेशंच शिवालये।।
द्वादशैतानि नामानि प्रातरूत्थाय यः पठेत्।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति।।
यं यं काममपेक्ष्यैव पठिष्यन्ति नरोत्तमाः।
तस्य तस्य फलप्राप्तिर्भविष्यति न संशयः।।

अर्थात – सौराष्ट्र प्रदेश (काठियावाड़) में श्रीसोमनाथ, श्रीशैल पर श्रीमल्लिकार्जुन, उज्जयिनी (उज्जैन) में श्रीमहाकाल, ॐकारेश्वर अथवा अमलेश्वर, परली में वैद्यनाथ, डाकिनी नामक स्थान में श्रीभीमशङ्कर, सेतुबंध पर श्री रामेश्वर, दारुकावन में श्रीनागेश्वर, वाराणसी (काशी) में श्री विश्वनाथ, गौतमी (गोदावरी) के तट पर श्री त्र्यम्बकेश्वर, हिमालय पर केदारखंड में श्रीकेदारनाथ और शिवालय में श्रीघुश्मेश्वर। जो मनुष्य प्रतिदिन प्रात:काल और संध्या के समय इन बारह ज्योतिर्लिङ्गों का नाम लेता है, उसके सात जन्मों का किया हुआ पाप इन लिंगों के स्मरण मात्र से मिट जाता है।

मल्लिकार्जुन – दक्षिण का कैलाश, आन्ध्र प्रदेश के कृष्णा ज़िले में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल पर्वत पर श्रीमल्लिकार्जुन विराजमान हैं। ऐसी मान्यता है की, श्रीशैल पर्वत पर भगवान शिव का पूजन करने से अश्वमेध यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है। श्रीशैल के शिखर के दर्शन मात्र से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो, अनन्त सुखों की प्राप्ति होती है और संसार में आवागमन से मुक्ति मिल जाती है।

पौराणिक कथा– जब कार्तिकेय और गणेश दोनों विवाह योग्य हुए। तब किसका विवाह पहले हो , इसपर विवाद होने लगा। माता-पिता ने कहा, जो इस पृथ्वी की परिक्रमा पहले करेगा, उस का विवाह पहले किया जाएगा। कार्तिकेय जी तत्काल पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए दौड़ पड़े। स्थूलकाय गणेश जी का अपने वाहन मूषक पर पृथ्वी परिक्रमा असंभव था। अतः बुद्धिदेव गणेश ने माता पार्वती और पिता देवाधिदेव शिव को आसन आसीन कर उनकी सात परिक्रमा की और विधिवत् पूजन कर उनका आशीर्वाद लिया। फलतः गणेश माता-पिता की परिक्रमा कर पृथ्वी की परिक्रमा से प्राप्त होने वाले फल की प्राप्ति के अधिकारी बन गये।

पित्रोश्च पूजनं कृत्वा प्रकान्तिं च करोति यः।
तस्य वै पृथिवीजन्यं फलं भवति निश्चितम्।।

उनकी चतुराई से शिव और पार्वती प्रसन्न हुए और गणेश जी का विवाह विश्वरूप प्रजापति की पुत्रियां सिद्धि और ऋद्धि से करा दिया।
कार्तिकेय सम्पूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा करके वापस आये। सारी बात जान कर नाराज़ कार्तिकेय, घर त्याग कर क्रौंच पर्वत पर चले गए। शिव और पार्वती ने कार्तिकेय को मनाने का बहुत प्रयास किया। पर वे वापस नहीं आये। तब दुखी माता पार्वती भगवान शिव को लेकर क्रौंच पर्वत पर पहुँची। भगवान शिव क्रौंच पर्वत पर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए और मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के नाम से जाने गए। मल्लिका, माता पार्वती का नाम है और भगवान शंकर को अर्जुन कहा जाता है। अतः इसे मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। परंतु कार्तिकेय उनके आने से पहले क्रौंच पर्वत छोड़ कर जा चुके थे।

सोमनाथ ( ज्योतिर्लिंग -1)

SHIV
SHIV

ज्योतिर्लिंग – पुराणों के अनुसार शिवजी जहाँ-जहाँ स्वयं प्रगट हुए उन बारह स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। हिंदु मान्यतानुसार इनके दर्शन, पूजन या प्रतिदिन प्रात:काल और संध्या के समय इन बारह ज्योतिर्लिङ्गों का नाम लेने मात्र से सात जन्मों का पाप नष्ट हो जाता है।

शिव पुराण – शिव पुराण, कोटि ‘रुद्रसंहिता’ में इस प्रकार बारह ज्योतिर्लिंगों की चर्चा है, जिसमें सोमनाथ का वर्णन प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में किया गया है।
सौराष्ट्रे सोमनाथंच श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोंकारं परमेश्वरम्।।
केदारं हिमवत्पृष्ठे डाकियां भीमशंकरम्।
वाराणस्यांच विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।।
वैद्यनाथं चिताभूमौ नागेशं दारूकावने।
सेतूबन्धे च रामेशं घुश्मेशंच शिवालये।।
द्वादशैतानि नामानि प्रातरूत्थाय यः पठेत्।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति।।
यं यं काममपेक्ष्यैव पठिष्यन्ति नरोत्तमाः।
तस्य तस्य फलप्राप्तिर्भविष्यति न संशयः।।

अर्थात – सौराष्ट्र प्रदेश (काठियावाड़) में श्रीसोमनाथ, श्रीशैल पर श्रीमल्लिकार्जुन, उज्जयिनी (उज्जैन) में श्रीमहाकाल, ॐकारेश्वर अथवा अमलेश्वर, परली में वैद्यनाथ, डाकिनी नामक स्थान में श्रीभीमशङ्कर, सेतुबंध पर श्री रामेश्वर, दारुकावन में श्रीनागेश्वर, वाराणसी (काशी) में श्री विश्वनाथ, गौतमी (गोदावरी) के तट पर श्री त्र्यम्बकेश्वर, हिमालय पर केदारखंड में श्रीकेदारनाथ और शिवालय में श्रीघुश्मेश्वर। जो मनुष्य प्रतिदिन प्रात:काल और संध्या के समय इन बारह ज्योतिर्लिङ्गों का नाम लेता है, उसके सात जन्मों का किया हुआ पाप इन लिंगों के स्मरण मात्र से मिट जाता है।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग– यायावर शिव के १२ ज्योतिर्लिंग है। जिसमें गुजरात (सौराष्ट्र) के काठियावाड़ में सोमनाथ मन्दिर जिसे सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को प्रथम माना गया है।
माना जाता है कि पापनाशक-तीर्थ, सोमनाथ भगवान की पूजा और उपासना करने से क्षय तथा कोढ़ आदि जैसे कठिन रोग नष्ट हो जाते हैं। मान्यता है कि, देवताओं द्वारा स्थापित सोमकुण्ड में लगातार छः माह तक स्नान करने से क्षय जैसे रोग ठीक हो जाते हैं।

सोमनाथ
सोमनाथ

पौराणिक कथा –हर रात गगन में, दस सफेद घोड़े या मृगवाले रथ पर सवार युवा, सुंदर चंद्र मन मस्तिष्क, भावनाओं, संवेदनशीलता, कोमलता और कल्पनाशीलता का प्रतिनिधित्व करता है । उन्हें राजनीपति (रात का स्वामी ) और सोम भी कहा गया है। ऐसे उज्ज्वल चाँद से प्रजापति दक्ष ने अपनी सत्ताइस पुत्रियों का विवाह प्रसन्नपूर्वक किया।

चन्द्रमा को अपनी सत्ताइस पत्नियों में रोहिणी विशेष प्रिय थी। अतः अन्य 26 पत्नियों ने अपने पिता अपनी व्यथा कही। पुत्रियों की व्यथा और चन्द्रमा के पक्षपातपूर्ण व्यवहार सुनकर दक्ष भी दुःखी हुए। उन्होने ने अपने दामाद समझाने का बहुत प्रयास किया। पर चंद्रमा उनकी अवज्ञा करते रहे। क्रोधित हो दक्ष ने चंद्रमा को क्षयरोग होने का श्राप दे दिया। इस श्राप से मुक्ति के लिए चंद्र ने पर कठिन शिव आराधना और मृत्युंजय-मंत्र जप किया। शिव उनकी दृढ़ भक्ति को देखकर इस स्थान पर साकार लिंग रूप में प्रकट हो गये। शिव ने साक्षात दर्शन दे कर वर दिया कि उसकी कला प्रतिदिन एक पक्ष में क्षीण हुआ करेगी, जबकि दूसरे पक्ष में प्रतिदिन वह निरन्तर बढ़ती रहेगी। चन्द्रमा के नाम पर भगवान शिव सोमनाथ कहलाए और सोमेश्वर के नाम से प्रसिद्ध हुए।

जिंदगी के रंग ( 2) कविता

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       चलते -चलते लड़खड़ा गये क़दम,
तभी सहारे के लिये बढ़ आये नाजुक हाथ,
                    हैरानी से देखा,
                  ये तो वही हाथ हैं,
जिन्हे कभी मैंने पकड़ कर चलना सिखाया था,
सचमुच, जिंदगी रोज़ नये रंग दिखाती हैं हमें.

 

 

image from internet.

नेपाल में पशु बलि उत्सव पर रोक ( समाचार आधारित )

गढिमाई मेला – लगभग 300 वर्षों से पशु बली प्रथा गढ़िमाता मंदिर में आयोजित होता रहा है। यह विश्व का सबसे बड़ा  पशु-बलि उत्सव माना जाता है। गढिमाई मन्दिर, विश्व के एक मात्र हिन्दू देश, नेपाल  के दक्षिणी हिस्से  में  है।यह    ५ वर्ष बाद मनाया जाने वाला एक उत्सव है।

इस उत्सव में लाखों पशुओं की बलि दी जाती थी। इस  प्रचलन पर   विभिन्न   आन्दोलन के फलस्वरूप जुलाई  28, 2015  में  प्रतिबन्ध लगा दिया गया। जो एक सराहनीय कदम है।

दस लाख डालर का इनाम – क्या दूसरे ग्रहों पर जीवन है? (रिसर्च )

दस लाख   डालर का इनाम – क्या आप मानते है कि एलियन या पर ग्रहवासी होते है ? अगर हाँ, तब आपके लिए इनाम जीतने का सुनहरा अवसर है। यह चर्चा का विषय, बहुत पुराना है।अभी हाल में , 20 जुलाई  2015 को लंदन में विख्यात वैज्ञानिक स्टीफेन हौकिंस ने रूस के उद्धमी यूरी मीलनेर  के सौजन्य से  दस करोड़ डालर के  एक एलियन ख़ोज कार्यक्रम की शुरुआत की है। 

और भी जीवन है हमारे सिवा   – विद्धवान, स्टीफेन हौकिंस को अन्य ग्रहों पर जीवन होने का पूर्ण विश्वाश है। उनका मानना है कि  इस विशाल अन्तरिक्ष में हम अकेले  नहीं है। जीवन युक्त अन्य ग्रह भी हैं। जिसे वे खोजना चाहतें हैं। इस विषय पर खोज और अध्ययन चल रहें   है। अपने खोज को आगे बढ़ाने के लिए इस अभियान में एक अनोखा कदम उठाया गया  है। अन्य ग्रहों पर जीवन या सभ्यता संबन्धित सब से अच्छा संदेश या सूचना देनेवाले को दस लाख डालर  इनाम  की घोषणा की गई  है। 

हमारी प्राचीन मान्यताएं-    हमारे प्राचीन ग्रन्थों और किवदंतियों में स्वर्ग, पाताल और मृत्यु लोक की चर्चा मिलती है।

राजा बली की कहानी, नागलोग की किवदंतियाँ, रामायण में अहिरावण की बातें पाताल से जुड़ी  है। माना जाता है कि हमारी धरती या मृत्यु लोक के नीचे सात  और ऊपर सात  लोक है, जहां हमारे जैसा जीवन है।मानवों,पशु,पक्षियों,वनस्पतिओं  का निवास स्थल हमारी धरती है। देवी-देवताओं, पुण्य आत्माओं , अप्सराओ आदि  स्वर्ग में रहतें हैं।जो ऊपर के सात लोको में आता है। इसी तरह नीचे के सात लोकों अर्थात  पाताल लोक में राक्षसों, दैत्यों  , असुरों और नागों  का निवास स्थल है।

  पाताल के सात लोक  निम्नलिखित  है-

  1. अतल

  2. वितल

  3. सुतल

  4. रसातल

  5. तलातल

  6. महातल

  7. पाताल

इसी प्रकार धरती  से ऊपर सात लोकों की चर्चा होती है।मान्यता है कि ये सात लोक   देवी-देवताओं, आत्माओं, ऋषी-मुनी, अप्सराओं, पितरों आदि  का निवास स्थल है. स्वर्ग लोक या जो सात लोक ऊपर  है ,वे है – 

1.  भू

2. भुवः

3. स्व

4 . मह

5. जन

6. तप

7. सत्य

हमारे ग्रंथो में इस विषय की विस्तृत चर्चा मिलती है जिसमें दूसरे लोकों , वहाँ के जीवन, पृथ्वी से दूरी जैसी बातों का  उल्लेख है। इतनी विस्तृत जानकारी शायद हीं कहीं मिलती है।  पर सवाल है, क्या यह सब मात्र कल्पना है या सत्य? इसकी सत्यता की पुष्टि कैसे हो? शायद इन खोज अभियानों से कुछ मदद मिले।

Tropic of Cancer ( Geography )

Tropic of cancer, MP, India. zero or no shadow zone
Tropic of cancer, MP, India. zero or no shadow zone

Tropic of Cancer

The imaginary line, the Tropic of Cancer is the circle marking the latitude 23.5 degrees north, where the sun is directly overhead at noon on June 21. When the sun is overhead, the long shadows of objects at sunrise start becoming smaller and smaller. Finally the shadow is smallest. That why this zone is known as Zero or No shadow Zone.

   Tropic of Cancer, passing near Ujjain, MP India.    Tropic of Cancer passes through 8 (Eight) states of India. they are Gujara, Rajasthan, MP, Chhattisgarh, Jharkhand, West Bengal, Tripura and Mizoram.

 

 

 

image taken fron internet n  by rekha.

कर्क रेखा ( भौगोलिक ज्ञान )

भारत के मध्य से गुजरती कर्क रेखा
भारत के मध्य से गुजरती कर्क रेखा

कर्क रेखा ग्लोब के उत्तरी गोलार्ध में, पश्चिम से पूर्व की ओर खींची गई कल्पनिक रेखा हैं। भारत में कर्क रेखा मध्य प्रदेश में उज्जैन के करीब से निकलती है।

छाया रहित क्षेत्र या नो शैडो ज़ोन
छाया रहित क्षेत्र या नो शैडो ज़ोन

नो शैडो ज़ोन  – २१ जून को सबसे लंबा दिन और रात सबसे छोटी होती है। इस दिन सूर्य इस रेखा के एकदम ऊपर होता है। इसलिए सूर्य की किरणें यहां एकदम ऊपर से पड़ती हैं। इसलिए परछाईं एकदम छोटी होतीं है। जो ठीक नीचे होने से नज़र नहीं आती है। इस कारण इन क्षेत्रों को छायाविहीन क्षेत्र या अंग्रेज़ी में नो शैडो ज़ोन भी कहा जाता है।सूर्य की स्थिति मकर रेखा से कर्क रेखा की ओर बढ़ने को उत्तरायण एवं कर्क रेखा से मकर रेखा को वापसी को दक्षिणायन कहते हैं।

Shree Yantra Temple of Amarkantak ( travel experience)

Beautiful shree yantra temple.
Beautiful shree yantra temple.

Shree Yantra Temple, Amarkantak, chhatisgarh, India – a temple of its own kind in the       shape of powerful Sri Yantra.

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The temple is designed like Shree yantra. Shree Yantra is a Beautiful, complex, geometric, sacred and spiritual yantra used for meditation.

Excellent sculptures of temple

Construction only on Pushya Nakshatra day– in Amarkantak Valley , the Shri Yantra Temple is under construction for many years. As, it is constructed  according to Hindu calendar , only  on pushy Nakshatra day.
In Indian astrology nakshatras is used for accurate predictions and astrological analysis. Pushya is one among the 27 nakshatras. It is the most auspicious and effective for siddhi of tantra and mantra. Means it is extremely beneficial for the practitioner of spiritual and religious activities. It is believed that all new works, started during this time, are fulfilled and give positive results.

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Are we alone in the dark – or Aliens exist? (Latest Research )

ALIENSDo aliens exist– This is a controversial topic. Debate is going on. Mystery of existence of life on other planets is still matter of discussion and research.

Hindu cosmology Hindu mythology and cosmology explains about trailokya or triple world. It believes the existence of three worlds – prithvi, akash and patal.

Stephen Hawking – According to genius scientist Stephen Hawking “It’s time to commit to finding the answer to search for life beyond Earth,” “We are alive, we are intelligent, we must know”. “Mankind has a deep need to explore, to learn to know,” “We also happen to be sociable creatures. It is important to us to know if we are alone in the dark.”

Latest news – Well known physicist, Stephen Hawking and Russian entrepreneur, Yuri Milner, announced the launch of $100 million project on – Breakthrough Initiative, a new project to attempt to detect life in the Cosmos on July 20, 2015, in London.