
sexual harassment





पद्मावत कहें या पदमावती क्या फर्क पड़ता है ?
हम सब शोर कर रहे है सिर्फ
मृत इतिहास और उसके प्रमाणिकता की .
कोई क्यों नहीं सोचता इसके वर्तमान व भविष्य प्रभावों को ?
नारी अग्निदाह उत्सव का पुनर्जन्म तो नहीं है यह?
कुछ दशको पहले तक रूपकंवर की दर्दनाक सती
कथा त्याग कही जा रही थी .
बड़ी कठिनाईयों से हमारी आँखे खुलीं .
कहीं पद्मावती की सती कथा फिर इस आग
को लौ दिखा भड़का ना दे .
तब के जौहर की बात अौर थी।
कहने वाले कहते हैं –
अब – वैधव्य के बाद सती होने के
लिये मनोवैज्ञानिक दबाव डाले जाते थे .
चिता अग्नि के चारों ओर सजे मेले…..दर्शकोँ के
भीड़ -कोलाहल में सती की हृदयविदारक करूंण क्रंदन
दव जाती थी
या
क्या दबा दी जाती थी?
उनकें चिता पलायन प्रयास को पास खड़े कुछ लोग
विफल कर देते थे – लम्बे बाँस के सहारे उसे
लपलपाती अग्नि शिखा में वापस ढकेल कर
एक जीवित जलती नारी मंदिर की देवी बन जाती .
अगर यह स्वर्ग गमन का .… पूज्यनीय दैवी पथ है
तब मात्र नारी के लिये हीं क्यों ?
स्मिता सहाय के विचारों से प्रेरित.
Posted by Chandni Sahay
Magarpatta is a beautiful, eco-friendly, green cyber city . It has schools, Temple, commercial zone, residential neighbourhoods, a multi specialty hospital, Season shopping mall, multiple restaurants, a gymkhana and a large park called Aditi Garden.
Misty Mist Fountain Welcomes the visitors.
Clean and wide roads , trimmed grasses n hedges !!!!!
Another beautiful water fountain……..
Calm and quiet Mahalaxmi Temple.
Gymkhana – Gym, Beauty parlour, club swimming pool and steam bath , all in one place.
famous and beautiful Amanora Shopping mall just opposite side of Season’s mall
मगरपट्टा सिटी
किसी सिटी का नाम लिया जाता है, तो सामान्यतः हमारे मन में सड़कों, इमारतों और बाजारों की छवि उभरती है। किंतु कुछ स्थान केवल भौगोलिक इकाइयाँ नहीं होते, वे एक विचार होते हैं, एक दृष्टि होते हैं, और भविष्य के लिए रचा गया ऐसा प्रयोग होते हैं जो समय के साथ एक मिसाल बन जाते हैं। पुणे की धरती पर स्थित मगरपट्टा सिटी ऐसा ही एक नाम है।
भारत में शहरीकरण की कहानी जितनी तेज़ी से आगे बढ़ी है, उतनी ही तेज़ी से उसने अनेक चुनौतियाँ भी खड़ी की हैं—अनियोजित विस्तार, हरित क्षेत्रों का क्षय, यातायात की समस्या, प्रदूषण और सामाजिक असमानताएँ। ऐसे समय में यदि कोई नगर यह सिद्ध करे कि विकास और पर्यावरण, आधुनिकता और मानवीय संवेदनाएँ, आर्थिक प्रगति और सामुदायिक जीवन एक साथ चल सकते हैं, तो वह केवल एक आवासीय परियोजना नहीं रह जाता; वह एक आदर्श बन जाता है।
मगरपट्टा सिटी की कहानी –
यह केवल ऊँची इमारतों, आईटी कंपनियों और चौड़ी सड़कों का समूह नहीं है। यह उन किसानों की दूरदर्शिता का परिणाम है जिन्होंने अपनी भूमि बेचने के बजाय उसे मिलकर विकसित करने का साहसिक निर्णय लिया। यह कहानी है उस सोच की जिसने खेतों को कंक्रीट के जंगल में बदलने के बजाय एक सुव्यवस्थित, आत्मनिर्भर और हरित नगर का रूप दिया।
खेतों से नगर तक की यात्रा-
आज जहाँ आधुनिक भवन, कॉर्पोरेट कार्यालय और सुसज्जित उद्यान दिखाई देते हैं, कभी वहाँ विस्तृत कृषि भूमि थी। समय बदल रहा था। पुणे तेजी से विकसित हो रहा था। भूमि के मूल्य बढ़ रहे थे। ऐसे में अधिकांश स्थानों पर किसानों की भूमि धीरे-धीरे बिल्डरों के हाथों चली जाती है और मूल निवासी विकास की कहानी से बाहर हो जाते हैं।
एक अलग निर्णय –
स्थानीय कृषक परिवारों ने अपनी भूमि बेचने के बजाय साझेदारी का मार्ग चुना। उन्होंने विकास में भागीदार बनने का निश्चय किया। यह निर्णय केवल आर्थिक नहीं था; यह आत्मसम्मान और स्वामित्व का निर्णय था। परिणामस्वरूप एक ऐसी परियोजना का जन्म हुआ जिसमें भूमि के मूल स्वामी स्वयं विकास यात्रा का हिस्सा बने।
भारत में भूमि अधिग्रहण और शहरी विस्तार की अनेक कहानियाँ हैं, परंतु मगरपट्टा सिटी उन दुर्लभ उदाहरणों में से है जहाँ ग्रामीण समुदाय ने परिवर्तन का नेतृत्व किया।
एक विचार -‘सस्टेनेबल सिटी’
आज विश्व भर में “सस्टेनेबल डेवलपमेंट” अर्थात् सतत विकास की चर्चा होती है। मगरपट्टा सिटी ने इस विचार को व्यवहार में उतारने का प्रयास किया। यहाँ विकास का अर्थ केवल अधिक निर्माण नहीं था, बल्कि बेहतर जीवन था।
हरित क्षेत्र,
खुले मैदान,
वृक्षों से आच्छादित मार्ग,
पैदल चलने के अनुकूल वातावरण,
कार्यस्थल और निवास का संतुलन,
योजना
जब कोई व्यक्ति सुबह की सैर के लिए निकलता है और उसे पक्षियों का कलरव सुनाई देता है, जब बच्चे सुरक्षित वातावरण में खेलते हैं, जब कार्यालय और घर के बीच घंटों की यात्रा नहीं करनी पड़ती, तब समझ में आता है कि नगर नियोजन केवल इंजीनियरिंग का विषय नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता का प्रश्न भी है।
आधुनिक भारत का बदलता चेहरा
भारत के शहरों में अक्सर दो चरम दिखाई देते हैं—एक ओर अत्याधुनिक व्यावसायिक क्षेत्र और दूसरी ओर अव्यवस्थित शहरी विस्तार। मगरपट्टा सिटी ने इन दोनों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया। यहाँ आवासीय, व्यावसायिक और मनोरंजन संबंधी सुविधाओं को एकीकृत रूप में विकसित किया गया। इस दृष्टिकोण ने यह संदेश दिया कि किसी शहर को केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि जीवन जीने की जगह बनाना आवश्यक है।
यही कारण है कि यह परियोजना नगर नियोजन, रियल एस्टेट और सामुदायिक विकास के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखी जाती है।
तकनीक और प्रकृति का संगम
आधुनिकता का अर्थ प्रकृति से दूरी नहीं होना चाहिए। मगरपट्टा सिटी का सबसे उल्लेखनीय पक्ष यही है कि यहाँ तकनीकी प्रगति और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया गया। आईटी पार्क और हरित क्षेत्र साथ-साथ विकसित किए गए। कार्यालयों की व्यस्तता के बीच उद्यानों की शांति, व्यापारिक गतिविधियों के बीच प्राकृतिक सौंदर्य, आधुनिक जीवनशैली के साथ सामुदायिक जुड़ाव, ये सभी तत्व इस नगर की पहचान बन गए।
सामुदायिक जीवन
किसी भी नगर की सफलता केवल उसकी इमारतों से नहीं मापी जाती। उसकी वास्तविक शक्ति वहाँ रहने वाले लोगों के सामाजिक संबंधों में निहित होती है।मगरपट्टा सिटी में सामुदायिक जीवन को विशेष महत्व दिया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम, उत्सव, खेल गतिविधियाँ और सामुदायिक सहभागिता के विभिन्न अवसर यहाँ के जीवन को जीवंत बनाते हैं। यहाँ रहने वाला व्यक्ति केवल एक फ्लैट का मालिक नहीं होता; वह एक समुदाय का सदस्य भी होता है।
आर्थिक विकास का केंद्र
पुणे लंबे समय से शिक्षा, उद्योग और संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। मगरपट्टा सिटी ने इस पहचान को नई दिशा दी। यह क्षेत्र सूचना प्रौद्योगिकी और कॉर्पोरेट गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया। देश और विदेश की अनेक कंपनियों की उपस्थिति ने इसे रोजगार और नवाचार का महत्वपूर्ण स्थल बना दिया। परिणामस्वरूप यहाँ न केवल आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों का भी तीव्र विकास हुआ।
एक पाठशाला
यदि कोई विद्यार्थी नगर नियोजन, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र या पर्यावरण अध्ययन का शोध कर रहा हो, तो मगरपट्टा सिटी उसके लिए एक जीवंत प्रयोगशाला की तरह है। यहाँ अनेक प्रश्नों के उत्तर मिलते हैं—
क्या विकास पर्यावरण के साथ संभव है?
क्या किसान विकास के भागीदार बन सकते हैं?
क्या आधुनिक नगरों में सामुदायिक भावना बची रह सकती है?
क्या आत्मनिर्भर और सुव्यवस्थित नगर बनाए जा सकते हैं?
मगरपट्टा सिटी इन प्रश्नों के प्रति आशावादी उत्तर प्रस्तुत करती है।
भविष्य की ओर संकेत
भारत तेजी से शहरी समाज की ओर बढ़ रहा है। आने वाले दशकों में करोड़ों लोग शहरों में बसेंगे। ऐसे में केवल नए भवन बना देना पर्याप्त नहीं होगा। आवश्यकता ऐसे नगरों की होगी जो मानव, प्रकृति और प्रौद्योगिकी के बीच संतुलन स्थापित कर सकें। मगरपट्टा सिटी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।यह हमें बताती है कि विकास केवल आर्थिक आँकड़ों का विषय नहीं है। विकास वह है जो मनुष्य के जीवन को अधिक सुगम, अधिक सम्मानजनक और अधिक संतुलित बनाए।
किसानों की दूरदर्शिता से प्रारंभ हुई यह यात्रा आज एक आधुनिक नगर के रूप में खड़ी है, किंतु इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि इसकी इमारतें नहीं, बल्कि वह विचार है जिसने इसे जन्म दिया।और शायद यही किसी भी महान नगर की सबसे बड़ी पहचान होती है—वह केवल स्थान नहीं रहता, एक प्रेरणा बन जाता है।
भारत का चर्चित नगर
मगरपट्टा सिटी केवल एक आवासीय परिसर नहीं, बल्कि एक सुविचारित शहरी पारिस्थितिकी तंत्र (Urban Ecosystem) है। यहाँ निवास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन और पर्यावरण को एक-दूसरे से जोड़ा गया है। यही कारण है कि यह क्षेत्र पुणे के आधुनिक विकास का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।
मगरपट्टा की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्वामित्व मॉडल है। भारत में सामान्यतः भूमि किसान से लेकर डेवलपर परियोजनाएँ विकसित करते हैं, परंतु यहाँ लगभग 120 से अधिक कृषक परिवारों ने अपनी भूमि का सामूहिक विकास किया। वे केवल भूमि विक्रेता नहीं बने, बल्कि विकास प्रक्रिया के सहभागी और लाभार्थी बने। इस मॉडल ने ग्रामीण समाज को यह संदेश दिया कि विकास का अर्थ विस्थापन नहीं, बल्कि सहभागिता भी हो सकता है।
मगरपट्टा सिटी पुणे के पूर्वी भाग में स्थित है। इसकी स्थिति इसे विशेष महत्व प्रदान करती है।
यह क्षेत्र हड़पसर के निकट है।पुणे रेलवे स्टेशन से सुगम दूरी पर है।पुणे हवाई अड्डे से जुड़ा हुआ है। कोरेगांव पार्क, कल्याणी नगर और कैंप जैसे प्रमुख क्षेत्रों के समीप है। आईटी और कॉर्पोरेट गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है।स्थान की यह विशेषता इसे आवास और व्यवसाय दोनों के लिए आकर्षक बनाती है।
मगरपट्टा का साइबरसिटी क्षेत्र इसकी आर्थिक धड़कन है।यहाँ अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने कार्यालय स्थापित किए हैं। हजारों पेशेवर प्रतिदिन यहाँ कार्य करते हैं।नसाइबरसिटी की योजना इस प्रकार बनाई गई कि कार्यस्थल और निवासीय क्षेत्र के बीच संतुलन बना रहे। इससे लंबी यात्राओं की आवश्यकता कम होती है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है।यह मॉडल आधुनिक “Walk-to-Work” अवधारणा का एक सफल उदाहरण माना जाता है।
मगरपट्टा में विभिन्न प्रकार के आवासीय परिसर विकसित किए गए हैं।यहाँ अपार्टमेंट, गेटेड कम्युनिटी, परिवार-केंद्रित आवास, वरिष्ठ नागरिकों के अनुकूल वातावरण उपलब्ध हैं।सुरक्षा, स्वच्छता और सुव्यवस्थित रखरखाव यहाँ के जीवन को सहज बनाते हैं।
यदि मगरपट्टा को “कंक्रीट के बीच हरियाली का द्वीप” कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। यहाँ अनेक उद्यान, हरित पट्टियाँ और खुले क्षेत्र विकसित किए गए हैं। सुबह के समय यहाँ पक्षियों का मधुर स्वर, वृक्षों की छाया और स्वच्छ वातावरण शहरी जीवन के तनाव को कम करने में सहायक बनते हैं। हरित क्षेत्र केवल सौंदर्य के लिए नहीं, बल्कि वायु गुणवत्ता सुधारने, तापमान नियंत्रित रखने और जैव विविधता को बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
किसी नगर की वास्तविक समृद्धि उसकी इमारतों से नहीं, उसके वृक्षों से भी आँकी जाती है। मगरपट्टा क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के वृक्ष देखने को मिलते हैं। इनमें से कई आयुर्वेदिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
नीम
आयुर्वेद में नीम को “सर्वरोगनिवारिणी” कहा गया है।
लाभ:
* रक्तशोधन
* त्वचा रोगों में उपयोगी
* जीवाणुरोधी गुण
* प्रतिरक्षा बढ़ाने में सहायक
पीपल
पीपल भारतीय संस्कृति और आयुर्वेद दोनों में महत्वपूर्ण है।
लाभ:
* श्वसन तंत्र के लिए उपयोगी
* वात-पित्त संतुलन में सहायक
* पर्यावरण में ऑक्सीजन संतुलन के लिए प्रसिद्ध
बरगद
बरगद दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
लाभ:
* मधुमेह संबंधी पारंपरिक उपचारों में उपयोग
* दंत स्वास्थ्य में सहायक
* आयुर्वेदिक औषधियों में उपयोग
अशोक
अशोक वृक्ष विशेष रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा माना जाता है।
लाभ:
* स्त्री रोग संबंधी आयुर्वेदिक उपचारों में उपयोग
* शीतल प्रभाव
* मानसिक शांति प्रदान करने वाला वातावरण
कदंब
कृष्ण परंपरा से जुड़ा कदंब वृक्ष सौंदर्य और पर्यावरण दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।
लाभ:
* छाल और पत्तियों का आयुर्वेदिक उपयोग
* वर्षा ऋतु में जैव विविधता को प्रोत्साहन
गुलमोहर
इसका मुख्य महत्व सजावटी है, परंतु इसकी हरियाली और छाया शहरी तापमान कम करने में सहायक होती है।
अमलतास
स्वर्णिम पुष्पों वाला यह वृक्ष आयुर्वेद में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
लाभ:
* पाचन संबंधी समस्याओं में उपयोग
* शीतल प्रकृति
* प्राकृतिक रेचक गुण
इन वृक्षों की उपस्थिति मगरपट्टा को केवल सुंदर नहीं बनाती, बल्कि पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी दृष्टि से भी समृद्ध बनाती है।
आधुनिक नगरों की सबसे बड़ी चुनौतियों में जल संकट शामिल है। मगरपट्टा में वर्षा जल संचयन, जल पुनर्चक्रण तथा जल प्रबंधन की अनेक व्यवस्थाएँ विकसित की गई हैं। यह दृष्टिकोण भविष्य के शहरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ऊर्जा दक्षता आधुनिक शहरी विकास का महत्वपूर्ण भाग है। यहाँ विभिन्न स्तरों पर ऊर्जा संरक्षण, हरित पहल और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को प्रोत्साहित किया गया है। सतत विकास का यही दृष्टिकोण इसे सामान्य आवासीय परियोजनाओं से अलग बनाता है।
एक सफल नगर केवल रोजगार से नहीं बनता; शिक्षा उसकी आत्मा होती है। मगरपट्टा और आसपास के क्षेत्र में अनेक विद्यालय, प्रशिक्षण संस्थान और उच्च शिक्षा केंद्र उपलब्ध हैं। इससे परिवारों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर प्राप्त होते हैं।
यहाँ व निकटवर्ती क्षेत्र में अनेक बहु-विशेषता अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध हैं। आपातकालीन चिकित्सा, नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ और विशेषज्ञ उपचार सुविधाएँ इस क्षेत्र को परिवारों के लिए उपयुक्त बनाती हैं।
मगरपट्टा में विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियाँ आयोजित होती रहती हैं।
* गणेशोत्सव
* दीपावली उत्सव
* खेल प्रतियोगिताएँ
* सामुदायिक कार्यक्रम
* संगीत एवं सांस्कृतिक आयोजन
इन गतिविधियों से सामाजिक जुड़ाव मजबूत होता है।
किसी नगर की गुणवत्ता इस बात से भी मापी जाती है कि वह अपने सबसे छोटे और सबसे वरिष्ठ नागरिकों का कितना ध्यान रखता है। मगरपट्टा में उपलब्ध हैं —
* खेल क्षेत्र
* उद्यान
* पैदल पथ
* बैठने के स्थान
* सुरक्षित वातावरण
पुणे के विकसित क्षेत्रों में मगरपट्टा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।यहाँ की संपत्तियों का मूल्य समय के साथ बढ़ा है। इसके पीछे प्रमुख कारण हैं—
* उत्कृष्ट स्थान
* सुव्यवस्थित नियोजन
* आईटी उद्योग की उपस्थिति
* जीवन की गुणवत्ता
शहरी नियोजन, समाजशास्त्र, पर्यावरण अध्ययन और अर्थशास्त्र के विद्यार्थियों के लिए मगरपट्टा
जब किसी शहर का एक महत्वपूर्ण केस स्टडी है। यह दर्शाता है कि—
* सामुदायिक भागीदारी कैसे काम करती है।
* पर्यावरण और विकास में संतुलन कैसे संभव है।
* किसान विकास के भागीदार कैसे बन सकते हैं।
हर सफल परियोजना की तरह मगरपट्टा के सामने भी चुनौतियाँ हैं।
* बढ़ता शहरी दबाव
* यातायात का विस्तार
* जनसंख्या वृद्धि
* पर्यावरण संतुलन बनाए रखना
आने वाले वर्षों में स्मार्ट सिटी, हरित तकनीक और सतत विकास की अवधारणाएँ और महत्वपूर्ण होंगी। मगरपट्टा पहले से ही इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। भविष्य में यह मॉडल अन्य भारतीय नगरों के लिए प्रेरणा बन सकता है।
साराशं
मगरपट्टा सिटी केवल ईंट, पत्थर और कंक्रीट का नगर नहीं है। यह दूरदर्शिता, सामूहिक प्रयास और संतुलित विकास की जीवंत कहानी है। यह उन किसानों के साहस का स्मारक है जिन्होंने परिवर्तन से भयभीत होने के बजाय उसका नेतृत्व किया। यह उन योजनाकारों की कल्पना का परिणाम है जिन्होंने विकास को केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रखा। और यह उन नागरिकों का नगर है जो आधुनिक सुविधाओं के बीच भी हरियाली, समुदाय और मानवीय मूल्यों को जीवित रखना चाहते हैं। शायद इसी कारण मगरपट्टा सिटी हमें यह विश्वास दिलाती है कि भविष्य के शहर केवल बड़े नहीं, बेहतर भी हो सकते हैं।
All images courtesy – Rekha Sahay.

Posted by Smita Sahay
Sharing a list of books that have helped me and other fibromyalgia and chronic pain survivors. I shall be sharing reviews of these books, and my own experience of working with them as separate stories. I shall also be adding new lists.
In the meantime I have linked each book to its Goodreads page and urge you to take a good look at readers’ response to these books.
Book List #1
Healing Back Pain by John Sarno
You Can Heal Your Life by Louise Hay
Molecules of Emotion by Candace Pert
Dynamic Laws of Healing by Catherine Ponder
Freedom from Fibromyalgia by Nancy Selfridge
![]()
<img class=”progressiveMedia-noscript js-progressiveMedia-inner” src=”https://cdn-images-1.medium.com/max/1600/1*dJsE9OcGo885soYY2cWBKQ.jpeg”>
The right books will provide knowledge, courage and companionship on your fibromyalgia journey
How to Work With Books in List #1:
Sequence: Work with books in a sequential order. Working with multiple books simultaneously has not proved effective for me.
Suitability: You are unique and so is your set of fibromyalgia symptoms. Working with certain books will prove more effective for you than with others. Look long and hard at their Goodreads and Amazon review and try to match your symptoms with the ones a particular book claims to help with.
Judgement: Try and answer for yourself: Do you believe in(i) the mind-body connection, or (ii) solid scientific facts explaining the physiology of fibromyalgia, or (iii) a book with worksheets and a clear path. Now examine each book’s Goodreads and Amazon reviews carefully to find the ones most in line with your belief system. Start there.
HealthFibromyalgiaPain ManagementBooksBooks Recommendation
One clap, two clap, three clap, forty?
By clapping more or less, you can signal to us which stories really stand out.
Follow
You must be logged in to post a comment.