ज़िंदगी के रंग -71

कुछ लम्हे गुजारे है,

मैंने भी अपने खास दोस्तो संग

लोग उन्हें वक़्त कहते है और

हम उन्हे जिंदगी कहते है .

 

 

Unknown

दोस्ती

वो दुश्मन बनकर,

मुझसे जीतने निकले थे,

दोस्ती कर लेते,

तो मैं खुद ही हार जाती !!

Unknown

ज़िंदगी के रंग -59

यह दुनिया निराली है .

राग -रंग, माया- मिथ्या

के बीच ,

कभी लगता है , सभी अपने है .

चारो ओर मेले ही मेले है .

कभी लगता है –

इस भरी दुनिया में तनहा है .

सब अकेले ही अकेले है .

उम्र और शौक़

पुराने रिश्ते

सुविख्यात पंजाबी लेखिका अमृता प्रीतम जी को उनकी पुण्यतिथि पर शत् शत नमन .

रिश्ते पुराने होते हैं

पर “मायका” पुराना नही होता

जब भी जाओ …..

अलाय बलायें टल जाये

यह दुआयें मांगी जाती हैं

यहां वहां बचपन के कतरे बिखरे होते है

कही हंसी कही खुशी कही आंसू सिमटे होते हैं

बचपन का गिलास….कटोरी ….

खाने का स्वाद बढ़ा देते हैं

अलबम की तस्वीरें

कई किस्से याद दिला देते हैं

सामान कितना भी समेटू

कुछ ना कुछ छूट जाता है

सब ध्यान से रख लेना

हिदायत पिता की ….

कैसे कहूं सामान तो नही

पर दिल का एक हिस्सा यही छूट जाता है

आते वक्त माँ, आँचल मेवों से भर देती हैं

खुश रहना कह कर अपने आँचल मे भर लेती है ….

आ जाती हूं मुस्करा कर मैं भी

कुछ ना कुछ छोड कर अपना

रिश्ते पुराने होते हैं

जाने क्योँ मायका पुराना नही होता

उस देहरी को छोडना हर बार ….आसान नही होता।

– अमृता प्रीतम

Dedicate yourself to those that love and understand you unconditionally.

क़ीमत

अपनी कीमत उतनी रखिए

जो अदा हो सके

ना कम ना ज़्यादा.

अगर बेमोल हो गए तो

कोई नहीं पूछेगा और

अगर अनमोल हो गए

तो तन्हा हो जाओगे. !

Art

Understanding is an Art ,

And

Everyone is not an Artist .

Unknown

ऐसा नहीं होता

जो हो इक बार वो हर बार हो, ऐसा नहीं होता

हमेशा एक ही से प्यार हो, ऐसा नहीं होता

कहीं कोई तो होगा जिसको अपनी भी ज़रूरत हो

हर इक बाज़ी में दिल की हार हो, ऐसा नहीं होता.

( सधन्यवाद जितेंद्र माथुर जी के कविता संकलन से प्राप्त रचना )

चाहो अपने आप को

कोई चाहे ना चाहे ,

तुम तो चाहो अपने आप को .

किसी और की नज़र में अपना मोल तौलने से पहले अपना मोल तो समझो .

वरना ज़िंदगी निकल जाएगी मोल-तोल

चाहने ना चाहने की जद्दो जहद में .