ख़त

पता बदल चुका है,

पर दिल है कि

मानता नहीं.

वही लवों पर छलकती

ख़तों की भाषा

पुरानी यादों की ख़ुशबू,

उसी पते पर आतीं और

द्वार खटखटातीं है.

शिद्दत

ज़रूर दिल बादलों का भी किसी ने दुखाया होगा,

वर्ना इतनी शिद्दत से बरसता कौन है?

Unknown

Rule of love- 2

The path to the Truth

is a labour of the heart,

not of the head.

Make your heart

your primary guide!

Not your mind.

Meet, challenge and ultimately prevail over your

nafs / false ego with your heart.

Knowing your ego will

lead you to the

knowledge of God.

Shams Tabriz spiritual instructor of  Rumi ❤️❤️

India makes history with Mars mission success in first attempt

ज़िंदगी के रंग -95

सोंच- संभाल कर

बोली के जादू को काम में लाओ .

बातों के रंग

निराले होते हैं.

ना जाने कब , कैसे

किसी की बातें

दिल में उतर कर मन मोह लेतीं हैं.

किसी की , तीर बन दिल को चीर जातीं हैं,

नश्तर बन मन को छलनी कर देतीं हैं.

Rule of love – 1

How we see God is a direct reflection of how we see ourselves.

If God brings to mind

mostly fear and blame,

it means there is too much

fear and blame welled inside us.

If we see God as full of love

and compassion, so are we.

– Shams Tabriz , spiritual instructor of Rumi ❤️❤️

INDIA SEEKS RUSSIA’S HELP FOR GAGANYAAN MISSION TO PUT MAN IN SPACE BY 2022

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ , के जन्मदिन (२३ सितंबर ) पर

राष्ट्र कवि, पद्म विभूषण रामधारी सिंह ‘दिनकर’ (२३ सितंबर १९०८-२४ अप्रैल१९७४) का जन्म सिमरिया, मुंगेर, बिहार में हुआ था । उन्होंने इतिहास, दर्शनशास्त्र और राजनीति विज्ञान की पढ़ाई पटना विश्वविद्यालय से की । उन्होंने संस्कृत, बांग्ला, अंग्रेजी और उर्दू का गहन अध्ययन किया था । उनकी अधिकतर रचनाएँ वीर रस से ओतप्रोत है ।

कुरूक्षेत्र – प्रथम सर्ग की चंद पंक्तियाँ

वह कौन रोता है वहाँ-

इतिहास के अध्याय पर,

जिसमें लिखा है, नौजवानों के लहु का मोल है

प्रत्यय किसी बूढे, कुटिल नीतिज्ञ के व्याहार का;

जिसका हृदय उतना मलिन जितना कि शीर्ष वलक्ष है;

जो आप तो लड़ता नहीं,

कटवा किशोरों को मगर,

आश्वस्त होकर सोचता,

शोणित बहा, लेकिन, गयी बच लाज सारे देश की ?

और तब सम्मान से जाते गिने

नाम उनके, देश-मुख की लालिमा

है बची जिनके लुटे सिन्दूर से;

देश की इज्जत बचाने के लिए

या चढा जिनने दिये निज लाल हैं ।

ईश जानें, देश का लज्जा विषय

तत्त्व है कोई कि केवल आवरण

उस हलाहल-सी कुटिल द्रोहाग्नि का

जो कि जलती आ रही चिरकाल से

स्वार्थ-लोलुप सभ्यता के अग्रणी

नायकों के पेट में जठराग्नि-सी ।

पहेली

आँसू और मुस्कान की पहेली पुरानी है.

ख़ुशी हो या ग़म

आँखे छलक हीं जातीं हैं.

ये मुस्कान भी फ़रेब है या सच

पहेली बन हीं जाती है .

New beginnings

Whenever they

rebuild an old building,

they must first of all

destroy the old one.

Rumi ❤️❤️