भटकती रही ज़िंदगी
सुंदरता की खोज में .
फिर समझ आया
तन नहीं मन
सुंदर हो , तब
सब कुछ सुंदर बन जाता है.

भटकती रही ज़िंदगी
सुंदरता की खोज में .
फिर समझ आया
तन नहीं मन
सुंदर हो , तब
सब कुछ सुंदर बन जाता है.

रौशनी की चाह में ……
वक़्त को रोकने की कोशिश में ……
सूरज की सुनहरी बिखरी रोशनी को
दुपट्टा की गाँठ में बाँधा.
दिन ढले गाँठें खोली ,
पर सुनहरी नहीं ,
चाँद की रूपहली रौशनी ……
चाँदनी बिखर गई हर ओर
ज़िंदगी शायद इसी का नाम है .

On the path of Love
we are neither
masters nor the
owners of our lives.
We are only a
brush in the hand
of the Master Painter.

On a day when the
wind is perfect,
the sail just
needs to open
and the world is
full of beauty.
Today is such a Day.

Rumi ❤️❤️
कुछ शब्दों को चुनते, उठाते
क्रम से सजाते ,
उसमें ना जाने कब
रंग ….रौशनी …चमक भर गई.
ख़ुशबू….यादें छलक आई ,
भावनाएँ और विचार समा गए .
देखा तो वह सामने थी एक –
कविता !!!!!


हम सब सागर जैसे है.
कभी गहरे शांत सागर सी शांत ज़िन्दगी.
कभी तूफ़ानी समंदर सी आती जाती ,
अनगिनत परेशानियों की लहरों में उलझे.
दिल में कई राज औ दर्द ,
सीपों में मोतियों सा छुपाए.
कभी पूनम की रात सा
चाँद को छूने के उल्लास से भरे .
क्या हम सब हैं सागर जैसे ?

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