वजूद है मेरी कुछ उलझी , कुछ सुलझी
अटकी इक तारीख़ के साथ.
जिसके आने का इंतज़ारों रहता
है और जाने का भी, यादों को झिंझोड़कर .
तुमसे बस यही पूछना था …..
जाने से पहले याद किया था क्या ?

वजूद है मेरी कुछ उलझी , कुछ सुलझी
अटकी इक तारीख़ के साथ.
जिसके आने का इंतज़ारों रहता
है और जाने का भी, यादों को झिंझोड़कर .
तुमसे बस यही पूछना था …..
जाने से पहले याद किया था क्या ?

बया की तरह झूमता झूलता नीड़ बनाया.
मोरपंखियों से सजाया
काल वैशाखी …. काल के क्रूर तेज़ तूफ़ानों
ने पल भर में …..
तहस -नहस कर
नीड़ उजाड़ दिया .

एक दिन मेरी क़लम ,
पन्ने और मेरे
अंदर की
लेखिका
कहीं खो गई .
पूछा अपने आप से –
क्या यह राइटर्स ब्लाक है
या कुछ और ?
बड़े जद्दोजहद
के बाद समझ आया .
दरअसल सच्चे जज़्बात, दुनियादारी
के तले दबने लगते हैं.
दुनियादारी या
सच्चे जज़्बातों
की
अभिव्यक्ति में किसी
एक का हीं अस्तित्व संभव है .
अपने आप को वापस पास लिया …..
यह मेरा नया जन्म दिन है.

The theme for International Thalassaemia Day 2019 (ITD2019) is ‘Universal access to quality thalassaemia healthcare services: Building bridges with and for patients.’
The International Thalassaemia Day, celebrated on May 8 every year is a commemoration day in honour of all patients with thalassaemia and their wards who never gave up despite all odds.
हर साल 8 मई को वर्ल्ड थैलेसिमिया डे मनाया जाता है। इस मनाने का सबसे बड़ा लक्ष्य है लोगों को रक्त संबंधित गंभीर बीमारी थैलेसीमिया के प्रति जागरुक करना। यह एक जेनेटिक बीमारी है जो बच्चों को उनके माता-पिता से मिलती है। इस बीमारी के चलते बच्चों में खून की कमी होने लगती है। जो जानलेवा हो सकती है।
बिगड़ी बातों को बनाना ,
नाराज़गी को संभालना,
तभी होता हैं जब
बिगाड़ने या नाराज़ होने वाला चाहे .
यह छोटी पर गूढ़ बात
बड़ी देर से समझ आई….
कि एक हाथ से ताली नहीं बजती.
Every morning
we are born again.
What we do today
is what matters most.”

Buddha 🌈
ज़ुबान से कही बातों से ज़्यादा बातें
कह देती है अनकही रूहानी इश्क़ .


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