
The taste of liberation
Just as the great ocean
has one taste, the taste of salt,
so also this teaching and
discipline has one taste,
the taste of liberation.

Buddha 🌈
Bhagvat Gita in a glance


ज़िन्दगी के रंग – 148 (मसाई मारा )
मसाई मारा, केन्या,अफ़्रीका के यात्रा के दौरान देखी एक सच्ची दिल को छूने वाली घटना पर आधारित ।


देखा था एक तकती माँ को तपती धूप में ,
अफ़्रीका के जंगलो में जहाँ मौत और
ज़िन्दगी के बीच कितना फ़ासला है कोई नहीं जानता .
तब नहीं मालूम था जल्द जीवन का कठोरतम सत्य भी देखना है।
वहाँ देखा था बड़ी– बड़ी, मासूम आँखों वाली
मंजुल, मासूम, नाज़ुक सी गजेल हिरणी को
सुनहरी घास में दमकती स्वर्ण सी
मातृत्व प्रेम से अोत–प्रोत
क्या ऐसे हीं सौंदर्य ने मोहा था वनवासी सिया को?
अौर भेज दिया था उन्होंने राम को उसके पीछे?
अौर तभी कुछ पल पहले दुनिया में आया नवजात,
कुछ पल में शिकार हो गया लोमड़ी जोड़े का,
नोचे, मृत छौने को चाटती , डबडबाई आँखें, भय,
मोह, फिर से पाने की चाह में, ज़बरदस्ती खड़ा करने की कोशिश में,
अपने प्राणों की चिंता किए बिना
कभी पास आते लोमड़ियों से बिना ङरे दूर भगाती,
कभी बच्चे के पास आ कर भी ना आती, सहमी पर
निर्भय हो क्रूर, अपने से मजबूत अौर शक्तिशाली
दुश्मन को दूर–दूर तक दौङाती हिरणी.
आँखे आँसू से भर बंद हों गए,
कुछ बुँदें छलक गिर आईं भय से कस कर बंद मुट्ठियों पर
यह ह्रदय–विदारक दृश्य देखना कठिन था,
पर मौत पर कथन था गाइड का – आप भाग्यशाली है
क्योंकि मसाई मारा में ऐसे दृश्य के गवाह कम हीं होते हैं!
शायद धीरे धीरे मौत की सच्चाई समझ आने लगी थी
लाचार माँ को , थोड़ी दूर दूर थी वह अब बच्चे से …….
देखा था एक तकती माँ को
उसकी बड़ी–बड़ी डबडबाई आँखें को !
अौर देखा शिकारियों को भी माँ के जाने का इंतज़ार करते…….
अफ़्रीका, मसाई मारा के जंगलो में जहाँ
देखे कई रंग ज़िन्दगी के…….।
शुभ अक्षय तृतीया Happy Akshay Tritiya !!!
7 May – अक्षय तृतीया का महत्व।
- आज ही के दिन माँ गंगा का अवतरण धरती पर हुआ था ।
- महर्षी परशुराम का जन्म आज ही के दिन हुआ था ।
- माँ अन्नपूर्णा का जन्म भी आज ही के दिन हुआ था
- द्रोपदी को चीरहरण से कृष्ण ने आज ही के दिन बचाया था ।
- कृष्ण और सुदामा का मिलन आज ही के दिन हुआ था ।
- कुबेर को आज ही के दिन खजाना मिला था ।
- सतयुग और त्रेता युग का प्रारम्भ आज ही के दिन हुआ था ।
- ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण भी आज ही के दिन हुआ था ।
- प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री बद्री नारायण जी का कपाट आज ही के दिन खोला जाता है ।
- बृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में साल में केवल आज ही के दिन श्री विग्रह चरण के दर्शन होते है अन्यथा साल भर वो बस्त्र से ढके रहते है ।
- इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था ।
अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किंतु वैशाख माह की तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है।
Akshaya Tritiya
mind is not filled with desires…..
There is no fear
for one whose
mind is not filled
with desires.

Buddha 🌈
रिज़ल्ट – संदेश
दसवीं और बारहवीं क्लास
के बच्चों के रिज़ल्ट निकल गए .
बड़े और बूढ़े बच्चों के रिज़ल्ट
23 मई ( चुनाव नतिजे ) को निकलेगें.
उनसे तुम्हें यह सीखना है……..
बस यही 10-12 वीं की परीक्षा आख़री नहीं .
अभी जीवन के और ढेरों इम्तिहान बाक़ी है.
अच्छा किया है , तब अच्छी बात है,
मन के लायक़ नहीं किया तब भी डरो मत .
जीवन में संभलने और
आगे बढ़ने के अनेको मौक़े मिलेंगे.
देखो ! बड़े और बूढ़े बच्चों का रिज़ल्ट
23 मई को निकलेगा .
कभी उन्हें पीछे हटते देखा है?
Suggestion for everyone- each and every child is a beautiful and unique gift of god. Accept them as they are.

To Change the world!
Dedication to all parents. As Recently result of class 10th and 12th are out.


Forwarded as received
Be kind
क्या आप जानते हैं ? “फोमो ” या कुछ चूक जाने का भय क्या है?
अपने मनोवैज्ञानिक स्वयं बने और अपने व्यवहार को समझे । फोमो एक ऐसी आशंका को कहते हैं जिसमें व्यक्ति फोन या इंटरनेट की दुनिया में हर समय अपनी उपस्थिति बनाये रखना चाहता है। अपनी अनुपस्थिति से परेशान होता या डरता है।
फीयर ऑफ मिसिंग आउट या फोमो एक नाकारात्मक मनोवैज्ञानिक स्थिति है। यह एक सोशल एंजाइटी है। यह लोगों से जुड़े रहने की इच्छा है। इससे अकेले छुटने का “अफसोस या डर भी कहा जा सकता है
लोगों के साथ जुड़ना या संबंध रखना मनुष्य का आवश्यक व्यवहार अौर मनोवैज्ञानिक आवश्यकता है। जो लोगों के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को साकारात्मक रुप से प्रभावित करता है। पर आज के आधुनिक युग में नए और आधुनिक संचार साधनों के आने से इसका रूप बदल चुका है। एक तरफ ऑनलाइन /इंटरनेट और विभिन्न साधनों जैसे मोबाइल फोन, स्मार्टफोन, कंप्यूटर, लैपटॉप आदि सुविधाएं और सामाजिक नेटवर्क जैसे फेसबुक टिवटर हमारे जीवन में शामिल होने से बहुत से अद्भुत और अनूठे अवसर मेरी जिंदगी में शामिल हो गए हैं।
इनकी अच्छाइयों के साथ साथ इनकी कुछ सीमाएं भी है। यह समझना जरूरी है। इनके अत्यधिक इस्तेमाल से एक ऐसी स्थिति आती है। जिससे इन पर मनोवैज्ञानिक निर्भरता से चिंता या एंजाइटी जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है अौर इन से डिस्कनेक्ट होकर रहने पर बहुत लोगों में एक ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। जिसके परिणाम स्वरूप मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने लगता है । जो कुछ लोगों के मूड अौर मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने लगता है। जिससे एंजाइटी, मानसिक तनाव जैसी बातें व्यक्तित्व में आने लगती हैं।
अतः जरूरत है, इन चीजों का उपयोग एक सीमा तक अपनी समझदारी से किया जाए।
Excess of everything is bad.
अति सर्वत्र वर्जयेत् ।।
Chanaky / चाणक्य


You must be logged in to post a comment.