पूर्व नाज़ी गार्ड को ९४ साल के वयस में जेल

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नाज़ियों ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान आउसवित्स शिविर में 11 लाख़ से ज्यादा लोगों की हत्या की थी जिनमें ज्यादातर यहूदी थे.

जर्मनी के पश्चिमी शहर डेटमॉल्ड में चार महीनों तक चले मुकदमे के बाद यह फ़ैसला आया है. 1942 से 1944 तक आउसवित्स में गार्ड रहे हनिंग ने शिविर में हुई घटनाओं की जानकारी होने की बात क़बूली . हनिंग ने कोर्ट को बताया – “मैं कहना चाहता हूं कि ये बात मुझे बहुत परेशान करती है कि मैं ऐसे आपराधिक संगठन का हिस्सा रहा. मैं शर्मिंदा हूं कि मैं अन्याय को देखता रहा और मैंने कुछ नहीं किया और इसके लिए मैं माफ़ी मांगता हूं. मुझे बहुत-बहुत खेद है.”

दक्षिण पोलैंड के आउसवित्स यातना शिविर में गार्ड रहे 94 साल के राइनहोल्ट हनिंग को पांच साल की जेल हुई है.
उन्हें एक लाख़ 70 हज़ार लोगों की हत्या में मदद करने का दोषी पाया गया है.

फ़ासिज़्म या राष्ट्रीय समाजवाद ,  जर्मनी की नाजी पार्टी के साथ जुड़ा राजनीतिक दल था। यह 1920 के दशक में शुरू हुई। पार्टी  ने 1933 में सत्ता हासिल किया तथा 1945 द्वितीय विश्व युद्ध तक जर्मनी में रही।  

 

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जीन मैपिंग और सौंदर्य

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हर इंसान की जेनेटिक बनावट अलग होती है. जिसे जीन मैपिंग कहते हैँ। वजह से लोग अलग अलग दिखते हैं. अलग बीमारियों के शिकार होते हैं.किसी को दिल की बीमारी होती है तो किसी को डायबिटीज़ की.  कई लोगों ने इसकी मदद से ख़ुद के बारे में  विभिन्न जानकारियां हासिल की है.

आजकल जीन मैपिँग का इस्तेमाल लंदन, बर्लिन , न्यूयार्क , सिंगापुर , हांगकांग जैसे देशों में खूबसूरत बनाने के लिये किया जा रहा हैं.

कुछ कम्पनियाँ  जीन मैपिंग   और डीएनए  टेस्ट का काम करती है. इससे प्राप्त नतीजों के आधार पर ट्रीटमेंट  प्रदान किया जाता हैं.

 

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नासा – मेटाबोलोमिक रिसर्च: आप वैसे हैं, जैसा आप खातें हैं, भारत: जैसा खाओगे अन्न, वैसा होगा मन

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नासा ने रिसर्च प्रोग्राम

नासा ने  रिसर्च प्रोग्राम के माध्यम से मानव स्वास्थ्य  का अध्ययन किया  है। यह  मार्क और स्कॉट केली अन्तरिक्ष यात्रिओं के खानपान  का अध्ययन  है।  जो उन्हों ने  एक साल के अंतरिक्ष मिशन के दौरान खाया था।  यह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर चल रहे दो अध्ययनों पर आधारित है.  यह वीडियो बताता है- आप वैसे हैं, जैसा आप खातें हैं। आहार निश्चित रूप से हम पर प्रभाव डालता।

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भारत: जैसा खाओगे अन्न, वैसा होगा मन 

जैसा खाओगे अन्न, वैसा होगा मन –  भोजन का जीवन में बड़ा महत्व है। यह  हमारे मनीषियों ने युगों पहले से कहा था।     भोजन संतुलित, सात्विक शुद्ध और पौष्टिक हो।  मान्यता है भोजन से शरीर की सात धातुओं का निर्माण और  संतुलन होता है। रस,रक्त,मांस,मज्जा,मेद,अस्थि और वीर्य या रज यह सात धातुएं भोजन से बनती हैं।

 

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न्यू मूर – एक विवादित द्वीप का गायब होना ( कविता)

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     अचानक एक दिन, बंगाल की खाड़ी में एक द्वीप उभर आया।

न्यू मूर 

 

1970 में एक ,चक्रवात भोला  …. की वजह से ।

दोनों देश – भारत और बांग्ला   देश लगे अपना अधिकार जमाने।

भूमि विवाद चल पड़ा।

चालीस वर्ष का द्वीप पलायन कर गया, इस  झगड़े को देख कर।

समा गया वापस उसी सागर में जहां से जन्म लिया था,

 और सुलझा गया विवादित झगड़ें को।

ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ती गर्मी से बढ़े जल स्तर  के नीच खो गया।

शायद मनुष्यों का लालच देख शर्मिंदा हो जलमग्न हो गया।   

( न्यू मूर द्वीपबंगाल की खाड़ी में  गंगा -ब्रह्मपुत्र डेल्टा क्षेत्र के तट पर 1970 में निकाल आया। जिसे 1974 में एक अमरीकी उपग्रह चित्रो में स्पष्ट देखा गया। इस पर भारत और बंगला देश दोनों ने अपना दावा किया। )

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कोमगाटा मारू ( सच्चाई पर आधारित मार्मिक कविता)

 

(यह भारतीयों की एक मार्मिक कहानी है। “कोमगाटा मारू” जापानी जहाज़ में 376 भारतीय यात्री सवार थे। यह जहाज़ 4 अप्रैल 1914 को निकला। ये भारतीय कनाडा सरकार की  इजाज़त से वहाँ पहुंचे। पर उन्हे बैरंग लौटा दिया गया। )

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सुदूर देशों में ज्ञान बाँटने और व्यवसाय करने,

         हम जाते रहें है युगों से।

          आज हम फिर, अच्छे जीवन की कामना, गुलामी और

                संभावित  विश्वयुद्ध के भय से भयभीत।  

                        निकल पड़े अनंत- असीम  सागर में,

                               कोमगाटा मारू जहाज़ पर सवार हो।

                                       चालीस दिनों की कठिन यात्रा से थके हारे,

                                               हम पहुँचे सागर पार अपने मित्र देश।

                                                         पर, पनाह नहीं मिला। 

 वापस लौट पड़े भारतभूमि,

        पाँच महीने के आवागमन के बाद

               कुछ मित्रो को बीमारी और अथक यात्रा में गवां।

                        टूटे दिल  और कमजोर काया के साथ लौट,

                               जब सागर से दिखी अपनी मातृभूमि।

                                       दिल में राहत और आँखों में आँसू भर आए।

   अश्रु – धूमिल नेत्रों से निहारते रहे पास आती जन्मभूमि – मातृभूमि।

 

 तभी ………………….

गोलियों से स्वागत हुआ हमारा। कुछ बचे कुछ मारे गए।

अंग्रेजों  ने देशद्रोही और प्रवासी का ठप्पा लगा ,

 अपने हीं देश आने पर, भेज दिया कारागार।

स्वदेश वापसी का यह इनाम क्यों?

 

 

छाया- चित्र इन्टरनेट के सौजन्य से।

राष्ट्रपिता के पौत्र वृद्धाश्रम में

 

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राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के पौत्र और पौत्र वधु “गुरु विश्राम वृद्ध आश्रम” दिल्ली में रह रहे हैं। संतानहीन कानुभाई रामदास गाँधी (87 वर्ष) और उनकी पत्नी ड़ा शिवा लक्ष्मी गाँधी (85 वर्ष ) चार दशक अमेरिका में रह कर 2014 में स्वदेश लौटे और विभिन्न आश्रमों में रह रहें हैं।

महात्मा गाँधी के पौत्र, कानुभाई रामदास गाँधी ने मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालजी से अप्लाइड मैथेमेटिक्स की पढ़ाई कर नासा लंगले रिसर्च सेंटर और रक्षा विभाग, अमेरिका  में कार्यरत थे। ड़ा शिवा लक्ष्मी गाँधी, पौत्र वधु पीएच ड़ी कर बोस्टन में पढ़ाती थीं। 

 

( हिन्दू अखबार, पृष्ठ – 8, तिथि -14 मई 2016  समाचार आधारित,    )

 

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Water Express

 

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A special train carrying lakhs of liters of water reached Latur on 12 th of April 2016. Latur ( Maharashtra ) is affected with sever drought.

Now its time to understand the value of water.  Water is rare  commodity. It should not be wasted.

 

Image by Chandni Sahay.

 

भरतीय किरपाल सिंह की मौत पाकिस्तान जेल मॆं

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ना जाने कितने सैनिक कैदी जेलों में आपनी जिंदगी काट देते हैं. कुछ के नाम उनके मौत के बाद अखबारों में एक दिन के लिये छप जाते हैं.

किरपाल सिंह भी एक ऐसा नाम हैं. मंगलवार को किरपाल सिंह का शव पाकिस्तान जेल से भारत आया. पर अफसोस की बात हैं कि उनका दिल और लिवर गायब था.

क्या देश के लिये मरने मिटने वाले सैनिकों का ऐसा जीवन होना चाहिये ?

 

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आत्मघाती बम बनते बच्चे



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बच्चे खूबसूरत फूलों की तरह होते हैं , और जिंदगी का सबसे खुबसूरत लम्हा बचपन होता हैं.
दरिँदगी की हद पार करते आतंकियों ने इन्हें भी नहीँ बख्शा हैं. आतंकी बच्चों का इस्तेमाल आत्मघाती हमलों में बम के रुप में करने लगे हैं.  दुखद बात हैं , ऐसे  बम बनाने में बालिकाओं का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता  हैं. लगभग एक वर्ष मॆं  बोको हरम द्वारा इस कृत्य मॆं लगभग 11 गुना अधिक बालिकाओं को लगाया गया हैं.
  दिल दहलाने वाले आंकड़े बताते हैं कि 2014  से 2016 के बीच चालीस से अधिक बच्चों को आत्मघाती बम के रुप मॆं जान गंवानी पड़ी  हैं. यह संख्या तेज़ी से बढ़ती जा रही हैं.
बच्चों को इस कुकृत्य मॆं लगाने से रोका जाना चहिये.

 

 

Image by Chandni Sahay.

नेपाल में पशु बलि उत्सव पर रोक ( समाचार आधारित )

गढिमाई मेला – लगभग 300 वर्षों से पशु बली प्रथा गढ़िमाता मंदिर में आयोजित होता रहा है। यह विश्व का सबसे बड़ा  पशु-बलि उत्सव माना जाता है। गढिमाई मन्दिर, विश्व के एक मात्र हिन्दू देश, नेपाल  के दक्षिणी हिस्से  में  है।यह    ५ वर्ष बाद मनाया जाने वाला एक उत्सव है।

इस उत्सव में लाखों पशुओं की बलि दी जाती थी। इस  प्रचलन पर   विभिन्न   आन्दोलन के फलस्वरूप जुलाई  28, 2015  में  प्रतिबन्ध लगा दिया गया। जो एक सराहनीय कदम है।