जलती झुलसती गर्मी का सामना करते
नाज़ुक झूमर से झूलते पीले
अमलतास के ये खूबसूरत फूल…..
संध्या के ढलते लाल सूरज की किरणें
और राहत भरे कुछ पल पा
हवा के झोंकों में झूमते इन फूलों …..
के नीचे लगता है बैठ
जीवन की सारी
थकान, परेशानी सब भूल
कुछ पल सुस्ता लें आँखें बन्द कर
बरसते सुवर्ण से इसकी कोमल
पंखुड़ियों के बर्षा के नीचे………
Hey Rekha here is your About me section….I have pasted it here..
Instead I have that Phoenix from the ashes poem excerpt as your description…











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