जंगलों के दुर्लभ दोस्त: धनेश (ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल) complete article

व्यक्तिगतअनुभव ‘धन का पक्षी’

मैंने कर्जत, मुंबई के एक फ़ार्महाउस में रहने के दौरान इस अद्भुत पक्षी के जोड़े को आसमान में ऊँची उड़ान भरते देखा। कुछ ही देर में यह जोड़ा सामने के पेड़ पर जा बैठा। उनकी खूबसूरती इतनी अद्भुत थी कि मैं सम्मोहित हो गई। बाद में पता चला कि स्थानीय आदिवासी लोग इसे ‘धनेश’ या ‘धन का पक्षी’ कहते हैं और इसे देखना शुभ मानते हैं।

परिचय

धनेश, महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट के घने जंगलों में पाया जाने वाला एक दुर्लभ और खूबसूरत पक्षी है। इसकी सबसे अनोखी विशेषता इसकी बड़ी और घुमावदार चोंच है, जो सींग जैसी दिखती है और इसे अन्य पक्षियों से अलग बनाती है। इनका वजन 2 से 4 किलोग्राम और लंबाई 94 से 130 सेंटीमीटर तक होती है। नर पक्षी की आँखें लाल होती हैं, जबकि मादा की आँखें हल्के नीले-सफेद रंग की होती हैं।

प्राकृतिक आवास

यह पक्षी मुख्य रूप से पश्चिमी घाट के घने वनों में पाया जाता है, जिसमें पुणे और मुंबई के बीच के जंगल भी शामिल हैं। ये ऊँचे पेड़ों के खोखलों में घोंसला बनाते हैं। मादा धनेश अप्रैल से जून के बीच अंडे देती है। अंडे देने के बाद, अंडे और बच्चों के सुरक्षा के लिए वह स्वयं को घोंसले के अंदर बंद कर लेती है। बच्चों के बड़े होने तक, नर पक्षी एक छोटे खुले छेद से उसे लगातार भोजन पहुंचाता रहता है। ये ज्यादातर फल, बीज, छोटे जीव-जंतु और कीड़े-मकोड़े खाते हैं। इन्हें विशेष रूप से अंजीर के फल पसंद होते हैं। यह पक्षी जीवनभर एक ही साथी के साथ वफादारी निभाता है।

अद्भुत अनुकूलन

धनेश की अनोखी चोंच भोजन इकट्ठा करने में मदद करती है, साथ हीं साथी को आकर्षित करने में भी सहायक होती है। इन्हें जंगलों का किसान भी कहा जाता है क्योंकि वे बीजों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे जंगलों में नए वृक्ष उगते रहते हैं और पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित बना रहता है। इस प्रकार, ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल वास्तव में जंगलों के सच्चे मित्र हैं।

संरक्षण चुनौतियाँ

धनेश को भारत में शुभ और धनदायक माना जाता है। यह केरल और अरुणाचल प्रदेश का राज्य पक्षी है। नागालैंड में हर साल हॉर्नबिल महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। लेकिन इसके बावजूद, यह असुरक्षित पक्षियों की श्रेणी में आता है।

इस पक्षी का शिकार मुख्य रूप से इसकी सुंदर कैस्क (सींग जैसी चोंच) के लिए किया जाता है, जिससे आभूषण बनाए जाते हैं। इसके मांस, पंख और चोंच का दवाइयों में उपयोग किया जाता है। ऐसे अंधविश्वासों के कारण इनकी संख्या लगातार घट रही है।

निष्कर्ष

धनेश के अस्तित्व को बचाने के लिये जागरूकता फैलाने और इसके प्राकृतिक आवासों की रक्षा करने की जरूरत है।

लेखिका:

डॉ. रेखा रानी

मनोविज्ञान में पीएचडी, एक अनुभवी मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता, पूर्व प्रोफेसर और लेखिका।

छाया चित्र सौजन्य:

निलेश धोके, पुणे, ताहिनी घाट, महाराष्ट्र (जनवरी 2023)

सारांश

जंगलोंकेदुर्लभदोस्त: धनेश (ग्रेटइंडियनहॉर्नबिल)

धनेश या ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल पश्चिमी घाट के जंगलों में पाए जाते हैं। यह  एक लुप्तप्राय और सुंदर पक्षी हैं। उनकी सींग जैसी चोंच साथी को आकर्षित करने, भोजन करने और बीज फैलाने में मदद करती है। ये पक्षी बीज फैलाकर नए पेड़ों को उगने में सहायक होते हैं। यह प्रकृति का संतुलन बना सच्चे दोस्त की भूमिका निभाते हैं। मादा धनेश अंडे देने के बाद खुद को घोंसले में बंद कर लेती है, जबकि नर पक्षी उसे छोटे छेद से भोजन देता रहता है। इनका मुख्य आहार फल और बीज होते हैं।

लेखिका: डॉ. रेखा रानी, मनोविज्ञान में पीएचडी, एक अनुभवी मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता, पूर्व प्रोफेसर और लेखिका हैं।

छायाचित्रसौजन्य: निलेश धोके, पुणे, ताहिनी घाट, महाराष्ट्र, जनवरी 2023।

सारांश

जंगलोंकेदुर्लभदोस्त: धनेश (ग्रेटइंडियनहॉर्नबिल)

धनेश या ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल पश्चिमी घाट के जंगलों में पाए जाते हैं। यह  एक लुप्तप्राय और सुंदर पक्षी हैं। उनकी सींग जैसी चोंच साथी को आकर्षित करने, भोजन करने और बीज फैलाने में मदद करती है। ये पक्षी बीज फैलाकर नए पेड़ों को उगने में सहायक होते हैं। यह प्रकृति का संतुलन बना सच्चे दोस्त की भूमिका निभाते हैं। मादा धनेश अंडे देने के बाद खुद को घोंसले में बंद कर लेती है, जबकि नर पक्षी उसे छोटे छेद से भोजन देता रहता है। इनका मुख्य आहार फल और बीज होते हैं।

लेखिका: डॉ. रेखा रानी, मनोविज्ञान में पीएचडी, एक अनुभवी मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता, पूर्व प्रोफेसर और लेखिका हैं।

छाया चित्र सौजन्य: निलेश डोके, पुणे, ताहिनी घाट, महाराष्ट्र, जनवरी 2023।

नीम-बबूल के दातुन

हमारे यहाँ दातुन बहुत प्राचीन समय से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसलिए दाँतों की सफाई, अच्छी सफाई, दुर्गंध से बचने के लिए, और दाँत-मसूड़े मजबूत करने हो, कैविटी से बचाव चाहिए, छालों आदि में राहत चाहिए, और साथ में अपने आप ही खून की सफाई भी हो — इन सभी चीजों को अगर एक साथ करना हो, तो सबसे बेहतर है दातुन करना.

इसके अलावा घरेलू नुस्खे भी काम में आते हैं। साथ में आयुर्वेदिक दंत-चिकित्सक भी बहुत सिद्ध औषधियाँ आजकल देते हैं, जिनमें हल्दी, सेंधा नमक, थोड़ी फिटकरी जैसी चीजें मिली होती हैं।

सुबह उठकर मुँह में ऐसी चीजें डालना कितना घातक हो सकता है, जिनमें हेवी मेटल्स और ना जाने कितने अस्वस्थ करने वाले केमिकल भरे होते हैं। सोचिए, दिन की शुरुआत ही अगर ज़हर जैसी चीज़ों से हो, तो शरीर पर उसका असर कितना गंभीर हो सकता है।

इनको छोड़कर अगर हम प्राकृतिक चीजों का उपयोग करें, तो वह कहीं ज़्यादा लाभदायक और सुरक्षित होता है — न सिर्फ दाँतों के लिए, बल्कि पूरे शरीर और मन के लिए भी।

तो बेहतर यही है कि अब आर्टिफिशियल चीजों से अपने आप को हटाकर प्राकृतिक की ओर चला जाए — स्वस्थ जीवन पाने के लिए।

Health – toothpaste

हाल ही में एक अमेरिकी उपभोक्ता संगठन Lead Safe Mama द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि 51 में से लगभग 90% टूथपेस्ट ब्रांड्स में सीसा (Lead), पारा (Mercury), आर्सेनिक (Arsenic) और कैडमियम (Cadmium) जैसे खतरनाक भारी धातुओं की उपस्थिति है। इनमें से कई ब्रांड्स बच्चों के लिए बनाए गए या “प्राकृतिक” और “सुरक्षित” के रूप में प्रचारित किए गए थे।

⚠️ प्रमुख निष्कर्ष:

90% टूथपेस्ट में सीसा, 65% में आर्सेनिक, लगभग 50% में पारा, और एक-तिहाई में कैडमियम पाया गया। जिन ब्रांड्स में ये धातुएं पाई गईं, उनमें शामिल हैं: Crest, Sensodyne, Tom’s of Maine, Dr. Bronner’s, Davids, और Dr. Jen। कुछ उत्पादों में इन धातुओं का स्तर वाशिंगटन राज्य की नई सीमा (1,000 ppb) से अधिक था, हालांकि ये अमेरिकी FDA की अधिक उदार सीमाओं (फ्लोराइड-रहित टूथपेस्ट के लिए 10,000 ppb और फ्लोराइड युक्त के लिए 20,000 ppb) के भीतर थे। इन धातुओं की उपस्थिति का मुख्य स्रोत बेंटोनाइट क्ले, कैल्शियम कार्बोनेट, और हाइड्रॉक्सीएपेटाइट जैसे घटक हो सकते हैं, जो टूथपेस्ट में सफाई और दांतों की मजबूती के लिए जोड़े जाते हैं।

🧒 बच्चों के लिए खतरा:

सीसा और पारा जैसे तत्व न्यूरोटॉक्सिन होते हैं, जो बच्चों के मस्तिष्क विकास, किडनी और हृदय स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सीसे के संपर्क के लिए कोई सुरक्षित स्तर नहीं होता।

✅ क्या करें?

सावधानीपूर्वक ब्रांड का चयन करें: ऐसे टूथपेस्ट चुनें जो विश्वसनीय हों और जिनमें इन खतरनाक घटकों की उपस्थिति न हो। घरेलू उपाय अपनाएं: यदि संभव हो, तो प्राकृतिक और घरेलू विकल्पों पर विचार करें, जैसे नीम, बबूल की दातुन आदि। बच्चों के लिए विशेष ध्यान दें: बच्चों के लिए विशेष रूप से बनाए गए सुरक्षित टूथपेस्ट का उपयोग करें और उनके दंत स्वच्छता उत्पादों की जांच करें।

The great Indian Hornbill

The great Indian hornbill

 

 

शुभ नववर्ष!! शुभ चैत्र नवरात्रि!

ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल

ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल (Great Indian Hornbill) का विस्तृत विवरण. वैज्ञानिक नाम: Buceros bicornis. संयुक्त नाम: ग्रेट पाइड हॉर्नबिल. परिवार: Bucerotidae (हॉर्नबिल परिवार). संरक्षण स्थिति: निकट संकटग्रस्त (Near Threatened) – IUCN रेड लिस्ट

1. परिचय

ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल भारत में पाए जाने वाले सबसे बड़े हॉर्नबिल पक्षियों में से एक है। यह अपनी बड़ी घुमावदार चोंच और उसके ऊपर सींग जैसी संरचना (कैस्क) के कारण विशेष रूप से पहचाना जाता है। यह पक्षी अपनी लंबी आयु, एक साथी के प्रति वफादारी, और पारिस्थितिकी तंत्र में बीज फैलाने की भूमिका के लिए जाना जाता है।

2. भौगोलिक विस्तार और प्राकृतिक आवास

ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल मुख्यतः भारत, भूटान, नेपाल, म्यांमार, थाईलैंड और इंडोनेशिया में पाया जाता है। भारत में यह खासतौर पर पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर भारत, और हिमालय की तराई क्षेत्रों में पाया जाता है।

आवास:

• घने सदाबहार वनों (Evergreen Forests)

• ऊँचे वृक्षों वाले वर्षावनों (Rainforests)

3. शारीरिक विशेषताएँ

• आकार: 95 से 130 सेंटीमीटर लंबा

• वजन: 2.5 से 4 किलोग्राम

• पंखों का फैलाव: 150 से 180 सेंटीमीटर

• रंग: शरीर काला और सफेद, चोंच पीले और नारंगी रंग की होती है

• कैस्क (सींग जैसी संरचना): नर में बड़ी और चमकीली, मादा में छोटी और हल्की

4. आहार और भोजन की आदतें

ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल मुख्य रूप से फलाहारी पक्षी है, लेकिन कभी-कभी छोटे जीव भी खा सकता है।

• मुख्य आहार: अंजीर (Fig), जामुन, केले, आम, और अन्य जंगली फल

• अन्य आहार: छोटे कीड़े, छिपकलियाँ, मेंढक, और पक्षियों के अंडे

5. प्रजनन और जीवन चक्र

• प्रजनन का समय: जनवरी से अप्रैल

• अंडे: मादा 1-2 अंडे देती है

• घोंसला बनाना: मादा अपने घोंसले के अंदर खुद को सील (बंद) कर लेती है और नर बाहर से भोजन देता है।

• बच्चों की देखभाल: बच्चे लगभग 60 से 75 दिनों में उड़ने योग्य हो जाते हैं।

6. पारिस्थितिकीय भूमिका (इकोलॉजिकल इंपोर्टेंस)

ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल को “जंगल का किसान” कहा जाता है क्योंकि यह बीजों को फैलाने (Seed Dispersal) में अहम भूमिका निभाता है, जिससे नए पेड़ उगते हैं और जंगलों का संतुलन बना रहता है।

7. सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व

• भारत में कई जनजातियाँ इसे शुभ पक्षी मानती हैं।

• अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में इसके पंख और चोंच का उपयोग पारंपरिक पोशाकों में किया जाता है।

• केरल और अरुणाचल प्रदेश का राज्य पक्षी है।

• नागालैंड में हॉर्नबिल महोत्सव मनाया जाता है।

8. संरक्षण स्थिति और खतरे

संरक्षण स्थिति: IUCN रेड लिस्ट में “Near Threatened” (नजदीकी संकटग्रस्त) के रूप में सूचीबद्ध है।

मुख्य खतरे:

1. वनों की कटाई – प्राकृतिक आवास का नुकसान

2. शिकार और अवैध तस्करी – चोंच और पंखों के लिए

3. शहरीकरण और पर्यावरणीय बदलाव

संरक्षण प्रयास:

• भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत सुरक्षा

• कई राज्यों में हॉर्नबिल संरक्षण परियोजनाएँ

• जंगलों को बचाने और स्थानीय जनजातियों को जागरूक करने के प्रयास

9. निष्कर्ष

ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल न केवल भारत के जंगलों की शान है, बल्कि यह पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे बचाने के लिए वन संरक्षण, शिकार पर प्रतिबंध, और जागरूकता अभियान चलाना बेहद जरूरी है।

ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल के बारे में कुछ दिलचस्प तथ्य

1. “जंगल का किसान” – ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल को जंगल का किसान कहा जाता है क्योंकि यह बीजों को दूर-दूर तक फैलाने में मदद करता है, जिससे नए पेड़ उगते हैं।

2. एक ही जीवनसाथी – यह पक्षी अपनी पूरी जिंदगी केवल एक ही जोड़े के साथ रहता है, यानी यह आजीवन एकनिष्ठ (Monogamous) होता है।

3. मादा खुद को घोंसले में बंद कर लेती है – जब मादा हॉर्नबिल अंडे देती है, तो वह खुद को पेड़ के खोखले में बंद कर लेती है और नर बाहर से भोजन पहुंचाता है।

4. कैस्क (सींग जैसी संरचना) का रहस्य – इसकी बड़ी और चमकीली चोंच के ऊपर एक सींग जैसी संरचना (Casque) होती है, जो मुख्य रूप से साथी को आकर्षित करने और आवाज को गूँजदार बनाने में मदद करती है।

5. शक्तिशाली उड़ान – अपने भारी शरीर के बावजूद, यह पक्षी बड़ी तेजी से उड़ सकता है और लंबी दूरी तय कर सकता है।

6. प्राकृतिक ध्वनि एम्पलीफायर – यह पक्षी जब आवाज निकालता है, तो उसकी चोंच पर मौजूद कैस्क उसे गूँजदार और तेज़ बनाता है, जिससे उसकी आवाज जंगल में दूर तक सुनाई देती है।

7. नर और मादा की आँखों में अंतर – नर हॉर्नबिल की आँखें लाल रंग की होती हैं, जबकि मादा की आँखें हल्के नीले रंग की होती हैं।

8. भारत के दो राज्यों का राज्य पक्षी – ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल केरल और अरुणाचल प्रदेश का राजकीय पक्षी है।

9. नागालैंड में हॉर्नबिल महोत्सव – नागालैंड में हर साल हॉर्नबिल महोत्सव मनाया जाता है, जिसमें इसकी महत्ता को दर्शाया जाता है।

10. शिकार और अवैध व्यापार का शिकार – दुर्भाग्य से, इसकी चोंच, पंख और मांस के लिए अवैध शिकार किया जाता है, जिससे इसकी संख्या लगातार कम हो रही है।

ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल न केवल जंगलों के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में मदद करता है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर का भी हिस्सा है। इसे बचाने के लिए संरक्षण प्रयासों को मजबूत करना बेहद ज़रूरी है।

*हॉर्नबिल की चोंच और पंख बेचने वाले समुदाय*

हॉर्नबिल की चोंच, पंख और अन्य अंगों की अवैध तस्करी मुख्य रूप से कुछ आदिवासी और बंजारों के समूहों द्वारा की जाती है। खासकर, पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में यह प्रथा देखने को मिलती है।

इनकी तस्करी में शामिल प्रमुख समुदाय:

1. नागा जनजाति (नागालैंड) – हॉर्नबिल के पंख और चोंच का उपयोग पारंपरिक आभूषणों और हेडगियर (सिर पर पहनने वाले सजावटी सामान) में किया जाता है।

2. अपटानी जनजाति (अरुणाचल प्रदेश) – पारंपरिक रीति-रिवाजों में इसके पंखों का इस्तेमाल किया जाता है।

3. वन गुर्जर और बंजारों के कुछ समूह (उत्तर भारत और नेपाल क्षेत्र) – ये लोग जंगलों में घूमते हैं और कभी-कभी अवैध रूप से वन्यजीवों के अंगों का व्यापार करते हैं।

4. म्यानमार और थाईलैंड के शिकारी समूह – ये अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हॉर्नबिल की चोंच और पंख बेचते हैं।

हॉर्नबिल के अंगों का उपयोग:

• चोंच (कैस्क) – गहने और सजावटी सामान बनाने में।

• पंख – पारंपरिक पोशाकों और हेडगियर में।

• मांस और चर्बी – कुछ समुदाय इसे औषधीय गुणों के लिए उपयोग करते हैं (हालांकि यह अवैज्ञानिक है)।

संरक्षण की आवश्यकता:

हॉर्नबिल कई जगहों पर संकटग्रस्त (Endangered) प्रजातियों में गिना जाता है। इसके शिकार और अंगों की तस्करी पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत सख्त प्रतिबंध है। इसके बावजूद, अवैध तस्करी जारी है, जिसे रोकने के लिए सरकार और वन्यजीव संगठनों को सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

अगर हॉर्नबिल बचेंगे, जंगल बचेंगे! अगर जंगल बचेंगे, हॉर्नबिल बचेंगे!!!

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