यह दुनिया निराली है .
राग -रंग, माया- मिथ्या
के बीच ,
कभी लगता है , सभी अपने है .
चारो ओर मेले ही मेले है .
कभी लगता है –
इस भरी दुनिया में तनहा है .
सब अकेले ही अकेले है .

यह दुनिया निराली है .
राग -रंग, माया- मिथ्या
के बीच ,
कभी लगता है , सभी अपने है .
चारो ओर मेले ही मेले है .
कभी लगता है –
इस भरी दुनिया में तनहा है .
सब अकेले ही अकेले है .


सुविख्यात पंजाबी लेखिका अमृता प्रीतम जी को उनकी पुण्यतिथि पर शत् शत नमन .
रिश्ते पुराने होते हैं
पर “मायका” पुराना नही होता
जब भी जाओ …..
अलाय बलायें टल जाये
यह दुआयें मांगी जाती हैं
यहां वहां बचपन के कतरे बिखरे होते है
कही हंसी कही खुशी कही आंसू सिमटे होते हैं
बचपन का गिलास….कटोरी ….
खाने का स्वाद बढ़ा देते हैं
अलबम की तस्वीरें
कई किस्से याद दिला देते हैं
सामान कितना भी समेटू
कुछ ना कुछ छूट जाता है
सब ध्यान से रख लेना
हिदायत पिता की ….
कैसे कहूं सामान तो नही
पर दिल का एक हिस्सा यही छूट जाता है
आते वक्त माँ, आँचल मेवों से भर देती हैं
खुश रहना कह कर अपने आँचल मे भर लेती है ….
आ जाती हूं मुस्करा कर मैं भी
कुछ ना कुछ छोड कर अपना
रिश्ते पुराने होते हैं
जाने क्योँ मायका पुराना नही होता
उस देहरी को छोडना हर बार ….आसान नही होता।
– अमृता प्रीतम

अपनी कीमत उतनी रखिए
जो अदा हो सके
ना कम ना ज़्यादा.
अगर बेमोल हो गए तो
कोई नहीं पूछेगा और
अगर अनमोल हो गए
तो तन्हा हो जाओगे. !

Understanding is an Art ,
And
Everyone is not an Artist .

Unknown
जो हो इक बार वो हर बार हो, ऐसा नहीं होता
हमेशा एक ही से प्यार हो, ऐसा नहीं होता
कहीं कोई तो होगा जिसको अपनी भी ज़रूरत हो
हर इक बाज़ी में दिल की हार हो, ऐसा नहीं होता.
( सधन्यवाद जितेंद्र माथुर जी के कविता संकलन से प्राप्त रचना )

कोई चाहे ना चाहे ,
तुम तो चाहो अपने आप को .
किसी और की नज़र में अपना मोल तौलने से पहले अपना मोल तो समझो .
वरना ज़िंदगी निकल जाएगी मोल-तोल
चाहने ना चाहने की जद्दो जहद में . 
गर्मी की छुट्टी में कही कोई *समर कैंप* नहीं होते थे,
पुरानी चादर से छत के कोने पर ही टेंट बना लेते थे ,
क्या ज़माना था जब ऊंगली से लकीर खींच बंटवारा हो जाता था,
लोटा पानी खेल कर ही घर परिवार की परिभाषा सीख लेते थे।
*मामा , मासी , बुआ, चाचा के बच्चे सब सगे भाई लगते थे, कज़िन क्या बला होती है कुछ पता नही था।*
घर छोटा ही सही पर प्यार से गुजारा हो जाता था.
*कंचे, गोटियों, इमली के चियो से खजाने भरे जाते थे,*
कान की गर्मी से वज़ीर , चोर पकड़ लाते थे,
*सांप सीढ़ी गिरना और संभलना सिखलाता था*,
*कैरम घर की रानी की अहमियत बतलाता था,*
घर छोटा ही सही पर प्यार से गुजारा हो जाता था.
*पुरानी पोलिश की डिब्बी तराजू बन जाती थी ,*
नीम की निंबोली आम बनकर बिकती थी ,
बिना किसी ज़द्दोज़हद के नाप तोल सीख लेते थे ,
साथ साथ छोटों को भी हिसाब -किताब सिखा देते थे ,
*माचिस की डिब्बी से सोफा सेट बनाया जाता था ,*
पुराने बल्ब में मनीप्लान्ट भी सजाया जाता था ,
घर छोटा ही सही पर प्यार से गुजारा हो जाता था.
*कापी के खाली पन्नों से रफ बुक बनाई जाती थी,*
*बची हुई कतरन से गुडिया सजाई जाती थी ,*
*रात में दादी-नानी से भूत की कहानी सुनते थे ,* फिर
*डर भगाने के लिये हनुमान चालीसा पढते थे,*
स्लो मोशन सीन करने की कोशिश करते थे ,
सरकस के जोकर की भी नकल उतारते थे ,
*सीक्रेट कोड ताली और सीटी से बनाया जाता था ,*
घर छोटा ही सही पर प्यार से गुजारा हो जाता था.
कोयल की आवाज निकाल कर उसे चिढ़ाते थे,
घोंसले में अंडे देखने पेड पर चढ जाते थे ,
गरमी की छुट्टी में हम बड़ा मजा करते थे ,
बिना होलिडे होमवर्क के भी काफी कुछ सीख लेते थे ,
शाम को साथ बैठ कर *हमलोग* देखा जाता था ,
घर छोटा ही सही पर प्यार से गुजारा हो जाता था……

Unknown
Raise your words,
not voice.
It is rain that grows flowers
not thunder.
💕Rumi

You must be logged in to post a comment.