रूह का सफ़र November 30, 2025November 30, 2025 Rekha Sahay ना गिन दौलत, ना गिन माल-ओ-असबाब, गिन बस अपनी साँसें, और हर लम्हा अमल में ढाल. रूह का सफ़र है, बाक़ी सब फ़ना है!!! Rate this:Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Share on Pinterest (Opens in new window) Pinterest Share on Tumblr (Opens in new window) Tumblr Share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn Share on Reddit (Opens in new window) Reddit Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Like Loading... Related
क्या ही सुंदर और गहरी पंक्तियाँ हैं! आपने कुछ ही शब्दों में ज़िंदगी का सार कह दिया— कि असली दौलत न सामान है, न प्रदर्शन, बल्कि हर साँस की जागरूकता और हर क्षण का सच्चा कर्म। LikeLiked by 2 people Reply
बहुत-बहुत धन्यवाद! आपकी रचनाएँ हमेशा गहरी संवेदनाओं और सच्चे अभिव्यक्ति से भरी रहती हैं। उन्हें पढ़ना अपने-आप में एक सुखद अनुभव होता है। आप ऐसे ही लिखते रहें, आपकी हर पंक्ति मन को छू जाती है। स्नेह और शुभकामनाएँ! 🙏✨ LikeLiked by 1 person
क्या ही सुंदर और गहरी पंक्तियाँ हैं!
आपने कुछ ही शब्दों में ज़िंदगी का सार कह दिया—
कि असली दौलत न सामान है, न प्रदर्शन,
बल्कि हर साँस की जागरूकता और हर क्षण का सच्चा कर्म।
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बहुता आभार मेरी रचित पंक्तियों को पसंद करने के लिए !.
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बहुत-बहुत धन्यवाद!
आपकी रचनाएँ हमेशा गहरी संवेदनाओं और सच्चे अभिव्यक्ति से भरी रहती हैं।
उन्हें पढ़ना अपने-आप में एक सुखद अनुभव होता है।
आप ऐसे ही लिखते रहें, आपकी हर पंक्ति मन को छू जाती है।
स्नेह और शुभकामनाएँ! 🙏✨
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धन्यवाद🙏💕
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