हर चर्चा, हर बात में ज़िक्र ‘मैं’ की दिखाता है अहंकार. पर ‘मैं’ या अपने वजूद की खोज, आध्यात्मिक खोज है- स्वयं की, अपने अस्तित्व की. हमें क्या जानना है जीवन समर में? हमें क्या सिद्ध करना है? अपना अहंकार या अपना अस्तित्व? इसे समझने के लिए अच्छा है, एक बार झाँक लेना अपने अंदर.

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