ज़िंदगी के रंग – 195

सुनना ना पड़े शिकवे हवाओं को इसलिये,

क़ैद कर दिया चराग-ए-लौ को काँच के ताबूत…

…..कांच की चिमनी में.

जैसे रुह  जिस्म के क़फ़स… पिंजरे में बंदी है,  

दुनिया के बंदिशों में। 

 

Table Brass Akhand diya

 

अर्थ- क़फ़स= पिंजरा, शरीर,जाली