सुनना ना पड़े शिकवे हवाओं को इसलिये,
क़ैद कर दिया चराग-ए-लौ को काँच के ताबूत…
…..कांच की चिमनी में.
जैसे रुह जिस्म के क़फ़स… पिंजरे में बंदी है,
दुनिया के बंदिशों में।

अर्थ- क़फ़स= पिंजरा, शरीर,जाली
सुनना ना पड़े शिकवे हवाओं को इसलिये,
क़ैद कर दिया चराग-ए-लौ को काँच के ताबूत…
…..कांच की चिमनी में.
जैसे रुह जिस्म के क़फ़स… पिंजरे में बंदी है,
दुनिया के बंदिशों में।

अर्थ- क़फ़स= पिंजरा, शरीर,जाली