उम्मीद पर ही तो दुनिया कायम है रेखा जी वरना इंसान जिये कैसे ? ग़ुलाम अली साहब की मशहूर ग़ज़ल – ‘दिल में एक लहर-सी उठी है अभी’ का अंतिम शेर है –
वक़्त अच्छा भी आएगा नासिर,
ग़म न कर ज़िंदगी पड़ी है अभी
जी , अपने हौसले को बनाए रखने के लिए यह सब लिखती रहती हूँ .
लोग समझते हैं , लिखना शग़ल है . पर सच यह है कि शग़ल के साथ साथ therapy भी है . आज की दुनिया इसे भले morning therapy/ writing therapy या जो चाहे कहे.
बड़ी प्रेरक और सुंदर पंक्तियाँ है .
सस्पेन्स वाली कहानियाँ मुझे अच्छी लगती है .
मैंने YouTube पर सुस्मिता सेन की एक suspense film ‘समय’ हाल में देखी. किसी English movie से inspired है , पर उसका अंत मुझे पसंद नहीं आया.
उम्मीद पर ही तो दुनिया कायम है रेखा जी वरना इंसान जिये कैसे ? ग़ुलाम अली साहब की मशहूर ग़ज़ल – ‘दिल में एक लहर-सी उठी है अभी’ का अंतिम शेर है –
वक़्त अच्छा भी आएगा नासिर,
ग़म न कर ज़िंदगी पड़ी है अभी
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जी , अपने हौसले को बनाए रखने के लिए यह सब लिखती रहती हूँ .
लोग समझते हैं , लिखना शग़ल है . पर सच यह है कि शग़ल के साथ साथ therapy भी है . आज की दुनिया इसे भले morning therapy/ writing therapy या जो चाहे कहे.
बड़ी प्रेरक और सुंदर पंक्तियाँ है .
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आप सही करती हैं रेखा जी । हम जैसे लोगों के लिए अपना हौसला बनाए रखने के लिए ऐसा कुछ करते रहना बहुत ज़रूरी है ।
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जी , बिलकुल. अपनी मदद आप करनी हीं होगी.
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मैंने ‘प्यार के राही’ सिनेमा देखा . कवलजीत के अलावा पात्र काम हीं जाने पहचाने थे. पर मूवी मुझे अच्छी लगी .
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मुझे ख़ुशी है कि आपको फ़िल्म अच्छी लगी ।
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सस्पेन्स वाली कहानियाँ मुझे अच्छी लगती है .
मैंने YouTube पर सुस्मिता सेन की एक suspense film ‘समय’ हाल में देखी. किसी English movie से inspired है , पर उसका अंत मुझे पसंद नहीं आया.
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