हाँ, ऐसा ही है। परन्तु वर्तमान समय के अनुसार हम कह सकते हैं कि ऐसा न हो। अगर हम इसे सभ्य शब्दों में कहे तो attraction/आकर्षण हमारी स्वाभाविक प्रक्रिया है।
मेरा मतलब किसी को बेवजह घूरने से नहीं था। ये बिल्कुल घटिया तरीका है।
हॉ, शायद उनकी जबान फिसल गई या उनके विचार ……
दरसल बड़े लोगों पर , यानी जो जितने बड़े ओहदे या पद पर रहता उस पर सम्भाल कर बातें करने की ज़िम्मेदारी उतनी हीं ज़्यादा होती है .
वैसे, प्रैक्टिकल रूप से वे इतना गलत नहीं हैं, हां वासना से घूरना और सौंदर्य को निहारना दो अलग अलग बातें हैं । परंतु ये भी है कि सौंदर्य पर मोहित व्यक्ति ही लगातार घूरता है,वासना से भरा व्यक्ति तो क्षणों में ही ऊब जाता है, और ये भी है कि सौंदर्य से आकर्षित व्यक्ति चेहरे को लगातार देखता है जबकी एक अश्लील व्यक्ति ना जाने क्या क्या देखता है। तो थोड़ी तो स्वतंत्रता मिलनी ही चाहिए, वरना प्रेम और रस लुप्त हो जायेगा जीवन से। और स्त्रियां ये भली भांति जानती हैं कि कौन से व्यक्ति कैसी दृष्टि से देख रहा है।
तुम बातें ठीक कह रहे हो . पर किसी की भावना और दिल के विचार समझना कठिन है .
दूसरी बात यह है कि जिसे घूरा या निहारा जा रहा है , अगर उसे यह पसंद ना आए तब ? महिलायें और लड़कियाँ तो अक्सर ऐसी बातों का सामना करती हैं.
अगर तुम्हें भी कोई लम्बे समय तक घूरे तब तुम भी परेशान या असहज महसूस करोगे और सशंकित हो जाओगे.
Par ma’am aapko nahi lagta ki ye manav samuday ka visesh lakshan hona v cahiye? Chama karen agar maine galat sawal pucha.
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मैं समझी नहीं .
क्या तुम कहना चाह रहे हो कि – घूरना / stare मानव समुदाय का विशेष लक्षण होना चाहिए ?
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हाँ, ऐसा ही है। परन्तु वर्तमान समय के अनुसार हम कह सकते हैं कि ऐसा न हो। अगर हम इसे सभ्य शब्दों में कहे तो attraction/आकर्षण हमारी स्वाभाविक प्रक्रिया है।
मेरा मतलब किसी को बेवजह घूरने से नहीं था। ये बिल्कुल घटिया तरीका है।
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हाँ, देखना /आकर्षित होना और घूरना अलग बातें हैं. जिस बात से कोई असहज / uncomfortably महसूस करे वह ग़लत है .
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अच्छा, तो अब हम इस निष्कर्ष पर पहंचे कि मंत्री जी गिरते-गिरते बच गये।😊😊
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हॉ, शायद उनकी जबान फिसल गई या उनके विचार ……
दरसल बड़े लोगों पर , यानी जो जितने बड़े ओहदे या पद पर रहता उस पर सम्भाल कर बातें करने की ज़िम्मेदारी उतनी हीं ज़्यादा होती है .
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वैसे, प्रैक्टिकल रूप से वे इतना गलत नहीं हैं, हां वासना से घूरना और सौंदर्य को निहारना दो अलग अलग बातें हैं । परंतु ये भी है कि सौंदर्य पर मोहित व्यक्ति ही लगातार घूरता है,वासना से भरा व्यक्ति तो क्षणों में ही ऊब जाता है, और ये भी है कि सौंदर्य से आकर्षित व्यक्ति चेहरे को लगातार देखता है जबकी एक अश्लील व्यक्ति ना जाने क्या क्या देखता है। तो थोड़ी तो स्वतंत्रता मिलनी ही चाहिए, वरना प्रेम और रस लुप्त हो जायेगा जीवन से। और स्त्रियां ये भली भांति जानती हैं कि कौन से व्यक्ति कैसी दृष्टि से देख रहा है।
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तुम बातें ठीक कह रहे हो . पर किसी की भावना और दिल के विचार समझना कठिन है .
दूसरी बात यह है कि जिसे घूरा या निहारा जा रहा है , अगर उसे यह पसंद ना आए तब ? महिलायें और लड़कियाँ तो अक्सर ऐसी बातों का सामना करती हैं.
अगर तुम्हें भी कोई लम्बे समय तक घूरे तब तुम भी परेशान या असहज महसूस करोगे और सशंकित हो जाओगे.
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