सप्त ऋषि तारों के छांव में

खुले आसमान के नीचे दमकते चाँद

और सप्त ऋषि तारों के छांव में

ऊनिंदी आँखों से देखा.

अधूरे अरमानो की तहों के बीच

रेशमी चाँदनी की खुलती गाँठें

लच्छे बन बिखर गए.

हम ने कहा तारों से – हमारी है

अनगिनत रिक्त… अधूरी चाह .

क्या तुम्हारा दर्द उनसे ज़्यादा हैं?

आसमानों के जलते बुझते सितारों ने कहा –

कभी सोचा क्या तुमने ?

क्यों हम इतना टिमटिमाते है ?

क्यों टूट-टूट कर बिखर जातें हैं?

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