
ज़िंदगी के रंग -128


हम सब सागर जैसे है.
कभी गहरे शांत सागर सी शांत ज़िन्दगी.
कभी तूफ़ानी समंदर सी आती जाती ,
अनगिनत परेशानियों की लहरों में उलझे.
दिल में कई राज औ दर्द ,
सीपों में मोतियों सा छुपाए.
कभी पूनम की रात सा
चाँद को छूने के उल्लास से भरे .
क्या हम सब हैं सागर जैसे ?

Know the true
definition of yourself.
That is essential.
Then, when youknow your own definition,
flee from it.

Rumi ❤️❤️