दिल और ज़ज्बातों के रिश्ते

सिमटते जा रहे हैं,

दिल और ज़ज्बातों के रिश्ते।

सौदा करने में जो माहिर है,

बस वही कामयाब है।

Unknown

13 thoughts on “दिल और ज़ज्बातों के रिश्ते

  1. आज सौदागरों और सौदागरी की ही तो पूछ है रेखा जी । जज़्बाती लोगों को तो इमोशनल फूल कहकर उनका मज़ाक ही उड़ाया जाता है । बेचने में जो माहिर है, उसकी कद्र है; उसकी नहीं जो जज़्बात के नाम पर बेमोल बिक जाए ।

    एक बहुत पुरानी ग़ज़ल का पहला ही शेर है :

    लोग मतलब में दिवाने हो गये, कुछ ज़ियादा ही सयाने हो गये;
    हाल उसका मुझसे अब क्या पूछिये. उसको देखे तो ज़माने हो गये

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